कोटिया सीमा विवाद की पृष्ठभूमि
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया क्षेत्र का सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। ओडिशा सरकार ने विवादित कोटिया क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने की अधिसूचना जारी करने पर आंध्र प्रदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। राज्य का आरोप है कि आंध्र प्रदेश ने अदालत के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश का उल्लंघन किया है।
इस मामले में दिलचस्प बात यह है कि ओडिशा में भाजपा की सरकार है, जबकि आंध्र प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सहयोगी टीडीपी सत्ता में है। इस राजनीतिक सहयोग के बावजूद, दोनों राज्यों के बीच विवाद का समाधान नहीं हो पा रहा है।
कोटिया का विवाद और चुनावी प्रक्रिया
कोटिया क्षेत्र ओडिशा के कोरापुट जिले के पोट्टांगी ब्लॉक में स्थित है। यहां के गांवों पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों अपना दावा करते हैं। ओडिशा के अनुसार, कोटिया ग्राम पंचायत के 28 गांव उसके क्षेत्र में आते हैं, जबकि आंध्र प्रदेश इनमें से 21 गांवों पर अपना अधिकार जताता है।
आंध्र प्रदेश की ओर से 10 अक्टूबर 2026 को चुनाव अधिसूचना जारी की गई, जिसके तहत विवादित क्षेत्र में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। ओडिशा सरकार ने इस पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
सुप्रीम कोर्ट में विवाद का इतिहास
कोटिया सीमा विवाद कई दशकों से चल रहा है। ओडिशा ने 1968 में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। वर्ष 2006 में अदालत ने दोनों राज्यों को विवादित क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था।
फरवरी 2021 में आंध्र प्रदेश ने विवादित क्षेत्र के कुछ गांवों में पंचायत चुनाव कराए थे, जिसके बाद ओडिशा ने अदालत में अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी। अब 2026 में चुनावी प्रक्रिया दोबारा शुरू होने पर ओडिशा ने नई याचिका दायर की है।
चुनाव की तैयारी और विवादित गांव
ताजा विवाद में फागुनासिनेरी, गांजेइपादर और फाटुसिनेरी जैसे गांवों के नाम शामिल हैं। इन गांवों से जुड़ी एमपीटीसी सीटों के लिए तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। मतदान 3 नवंबर को प्रस्तावित है, जबकि सरपंच और वार्ड सदस्य पदों के चुनाव 26, 29 नवंबर और 2 दिसंबर को अलग-अलग चरणों में होंगे।
हालांकि, कोरापुट की सब-कलेक्टर फाबी रशीद ने कहा कि क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्हें विवादित गांवों में चुनाव संबंधी गतिविधियां नहीं दिखीं। उनके अनुसार, ओडिशा की सीमा के भीतर मतदान केंद्र भी स्थापित नहीं किया गया था।
राजनीतिक समीकरण और विपक्ष की प्रतिक्रिया
ओडिशा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की भाजपा सरकार है, जबकि आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सरकार सत्ता में है। टीडीपी केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की महत्वपूर्ण सहयोगी है। इस राजनीतिक समीकरण के बीच विपक्ष ने ओडिशा सरकार से सवाल उठाए हैं।
बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए पूछा कि विधानसभा चुनाव के दौरान कोटिया विवाद के स्थायी समाधान का वादा करने वाली पार्टी अब क्या कर रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र में एनडीए की सरकार के लिए टीडीपी के समर्थन की राजनीतिक जरूरत इस मामले में ओडिशा के रुख को प्रभावित कर रही है।
ओडिशा सरकार की स्थिति
ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि आंध्र प्रदेश द्वारा 10 अक्टूबर को ओडिशा के कोटिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में चुनाव कराने संबंधी अधिसूचना जारी किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। पुजारी ने संवाददाताओं से कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मंजूरी मिलने के बाद यह कदम उठाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने विवादित क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करके अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है।





