कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस ने शनिवार को यह आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग जानबूझकर भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए एक साजिश का निर्माण कर रहा है, जिसका आरोप सॉफ्टवेयर पर लगाया जा रहा है, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया को धांधली का नाम देते हुए इसे तुरंत रोकने की जरूरत बताई।
इसके साथ ही रमेश ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि वह मतदाता सूचियों की निष्पक्ष जांच कराए, मशीन से पढ़े जा सकने वाले आंकड़े सार्वजनिक करे और प्रत्येक योग्य नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
मतदाता सूची में गड़बड़ियाँ
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में दिखाई दे रही गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए कहा, "मतदाता का नाम - 'राम ने यादव को मारा' और पिता का नाम - 'मूर्ख चंद्र यादव'। ऐसे कई उदाहरण हैं जो शुक्रवार को हुए चुनाव की मतदाता सूची में देखे गए हैं।"
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में ये गड़बड़ियाँ सामने आई हैं, तो यह कैसे कहा जा सकता है कि अन्य चुनावों में ऐसा नहीं हुआ होगा? उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र और मतदाता सूची की शुद्धता को सॉफ्टवेयर और ईसीआईनेट पर नहीं छोड़ा जा सकता। जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है, न कि सॉफ्टवेयर की।
निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी
कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी का बयान उन दो चुनाव आयुक्तों की चिंताओं को और मजबूत करता है, जिन्होंने इस संदर्भ में सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग असंवैधानिक तरीकों से चलाया जा रहा है। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि मतदाता सूचियों को गड़बड़ी से मुक्त रखना निर्वाचन आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि मतदाता को अपने मताधिकार का उपयोग करने में कोई कठिनाई न हो।
उन्होंने पीलीभीत में एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां 10,470 मतदाताओं के विवरण में बदलाव किया गया था, जबकि इन बदलावों के समर्थन में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं था।
मताधिकार से वंचित करने की आशंका
जयराम रमेश ने कहा कि जिन मतदाताओं के विवरण में बदलाव किया गया, उनमें से अधिकांश एक विशेष समुदाय के लोग हैं, जिन्हें भाजपा ने लगातार प्रताड़ित किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रकार की विसंगतियों के चलते मतदान के समय ऐसे मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने की साजिश हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि SIR के बाद जारी मतदाता सूची में नाम गायब होने की घटनाएँ सामने आई हैं और ऑनलाइन मतदाता पहचान पत्र (EPIC) संख्या खोजने पर गलत विवरण मिलने की भी शिकायतें मिली हैं। निर्वाचन आयोग ने अब तक कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा की गई मांग के अनुसार मशीन से पढ़े जा सकने वाले आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए हैं।





