हाल ही मिले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में चर्चित फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार प्रदान किया गया है। फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन को यह सम्मान मिलने पर जहां उनके समर्थकों और प्रशंसकों में उत्साह देखा गया, वहीं इस फैसले को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ फिल्म संस्थानों से भी इस पुरस्कार को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
FTII छात्र संगठन ने कहा- 'यह फिल्म नहीं, एक खतरनाक हथियार है'
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एफटीआईआई के छात्र संगठन ने फिल्म को नेशनल अवॉर्ड दिए जाने को लेकर नाराज़गी जताते हुए तीखा बयान जारी किया। संगठन ने कहा,
"‘द केरल स्टोरी’ कोई फिल्म नहीं, बल्कि एक राजनीतिक हथियार है। यह एक झूठा विमर्श है, जिसका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय और केरल जैसे बहुलतावादी राज्य को बदनाम करना है।"
बयान में यह भी कहा गया कि,
"राज्य प्रायोजित पुरस्कार अब बहुसंख्यकवादी और नफ़रत से भरे प्रोपेगेंडा को वैधता दे रहे हैं। यह न केवल कला की हत्या है, बल्कि सामाजिक हिंसा को भी संस्थागत स्वरूप दे रहा है।"
एफटीआईआई के छात्रों ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे इस फैसले का खुलकर विरोध करते रहेंगे। उनका कहना है कि वे उस इंडस्ट्री में प्रवेश करना चाहते हैं जो सत्य, रचनात्मकता और मानवीय मूल्यों पर टिकी हो – न कि झूठ और नफरत पर।
"हम इस्लामोफोबिया को पुरस्कार योग्य मानने से इनकार करते हैं। जब एक सरकारी संस्था अल्पसंख्यकों के खिलाफ डर फैलाने वाली फिल्म को बढ़ावा देती है, तो वह भविष्य की लिंचिंग, बहिष्कार और भेदभाव की नींव रखती है।"
सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित 'द केरल स्टोरी' उन महिलाओं की कहानी पर आधारित है जिन्हें कथित तौर पर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में जबरन शामिल कराया गया। फिल्म के कंटेंट और प्रस्तुति को लेकर भारी विवाद हुआ था।





