कांग्रेस का सख्त रुख
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने अपने रूख को स्पष्ट करते हुए सरकार को सख्त चेतावनी दी है। पार्टी ने कहा है कि यदि सरकार पुनः यह विधेयक लाती है, तो उसे एक बार फिर पराजय का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे पर सरकार को चारों ओर से घेरने के लिए तैयार है।
कांग्रेस के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मनमाने ढंग से परिसीमन को आगे बढ़ाया, तो उसे चुनावी परिणामों में पुनः नकारात्मक परिणाम का सामना करना पड़ेगा।
मल्लिकार्जुन खरगे का पत्र
कांग्रेस ने इस संदर्भ में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 16 अक्टूबर को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए सरकार से सवाल किया है। पार्टी ने यह पूछा है कि क्या लोकसभा में पहले ही पराजित हो चुके संविधान संशोधन विधेयक को फिर से लाने की कोशिश की जा रही है?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि यदि सरकार ने ऐसा कोई प्रयास किया, तो उसे सदन के सामने फिर से हार का सामना करना पड़ेगा। रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह सवाल उठाया कि क्या सरकार के पास परिसीमन के लिए कोई ठोस नया प्रस्ताव है और क्या उसने इस पर किसी राजनीतिक दल के साथ चर्चा की है?
संविधान संशोधन विधेयक पर प्रतिक्रियाएं
रमेश के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने अपने जवाब में मार्च 2026 में गृह मंत्री द्वारा कुछ राजनीतिक दलों के साथ की गई चर्चाओं का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि रीजीजू ने यह नहीं बताया कि इन चर्चाओं में गृह मंत्री ने जो आश्वासन दिए थे, वे 16 अप्रैल 2026 को पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किए गए।
रमेश ने बताया कि यह विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में 'निर्णायक रूप से' पराजित हो गया था और जिन दलों से परामर्श किया गया था, उनमें से अधिकांश ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया था। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन के लिए कोई ठोस नया प्रस्ताव है?
सर्वदलीय बैठक की मांग
रमेश ने यह भी बात की कि सरकार परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और अपना नया प्रस्ताव सभी दलों के सामने पारदर्शी तरीके से रखने से क्यों परहेज कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल लगातार सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहे हैं और खरगे ने इस संबंध में छह बार लिखित आग्रह किए हैं, जिनमें से चार पत्र प्रधानमंत्री को और दो पत्र रीजीजू को भेजे गए हैं।
रमेश ने अंत में कहा, "क्या मोदी सरकार का इरादा पराजित विधेयक को फिर से लाने और उसे 'महाकलंकित दो-तिहाई बहुमत' से पारित कराने की एक और कोशिश करने का है? यह निस्संदेह फिर विफल होगी।"





