नई दिल्ली: देश में मतदाता सूची (Voter List) के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लग रहे वोट चोरी के आरोपों को लेकर गरमाई सियासत के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान सामने आए हैं। जनता और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मूल सवालों—जैसे कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा अपने आप नाम कैसे काटे जा रहे हैं—का जवाब देने के बजाय, सरकार ने इस पूरे आंदोलन को 'रिजीम चेंज' की साजिश और 'घुसपैठियों को बचाने' का प्रयास करार दिया है।
"रिजीम चेंज" और विपक्ष की भूमिका
राजनाथ सिंह ने इस प्रोटेस्ट की तुलना बांग्लादेश की तर्ज पर 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) से करते हुए इसे गंभीर करार दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि लोकतंत्र में विपक्ष का मुख्य काम ही सरकार बदलना और चुनावी मैदान में उतरना होता है। 2014 में जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उसने भी कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था और आंदोलन किए थे। ऐसे में, यदि आज का विपक्ष शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में जंतर-मंतर या चुनाव आयोग के सामने प्रदर्शन कर रहा है, तो उसे साजिश या देशद्रोह करार देना तार्किक नहीं है।
घुसपैठ के आंकड़ों पर गृह मंत्रालय के आरटीआई खुलासे
अमित शाह ने राहुल गांधी और विपक्ष पर एसआईआर के बहाने घुसपैठियों को बचाने का आरोप लगाया है। असम और अन्य चुनावी राज्यों में 'लाखों घुसपैठियों' के आंकड़े बार-बार पेश किए जाते हैं। हालांकि, जब आरटीआई एक्टिविस्ट कन्हैया कुमार ने गृह मंत्रालय से पिछले 10 सालों में देश में पहचाने गए, पकड़े गए और वापस भेजे गए घुसपैठियों का डेटा मांगा, तो 23 जनवरी 2026 को दिए गए जवाब में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के पास घुसपैठियों की पहचान, गिरफ्तारी या वापस भेजने का कोई केंद्रीय आंकड़ा उपलब्ध ही नहीं है। इसके अलावा, भारतीय कानून में 'घुसपैठिया' (Infiltrator) जैसा कोई औपचारिक कानूनी शब्द भी मौजूद नहीं है।
ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी उठाया गया कि बिना पुख्ता कानूनी प्रक्रियाओं के लोगों को सीमाओं से बाहर धकेलने के मामले सामने आए हैं। एसआईआर और वोट चोरी जैसे गंभीर प्रशासनिक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के राजनीतिक नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के जवाब अभी भी जनता और विपक्ष को मिलने बाकी हैं।





