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कांग्रेस का धरना; राहुल-प्रियंका के कदम से INDIA गठबंधन में असंतोष

कांग्रेस के धरने से सहयोगी दलों में असंतोष और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हुई।

कांग्रेस का धरना; राहुल-प्रियंका के कदम से INDIA गठबंधन में असंतोष
फोटो: Congress Protest; Rahul and Priyanka's Actions Cause Discontent in INDIA Alliance

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर इंडिया गठबंधन का मार्च कांग्रेस के सहयोगियों के लिए असहज स्थिति पैदा कर गया। इस असहजता का प्रमुख कारण यह रहा कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठकर पूरे ध्यान को अपनी ओर आकर्षित किया। इससे सहयोगी दलों में असंतोष की भावना व्याप्त हो गई। कई विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह विरोध प्रदर्शन अंततः केवल दोनों भाई-बहनों का शो बनकर रह गया, क्योंकि अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस द्वारा थाने ले जाया गया।


सहयोगी दलों में अविश्वास

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, केसी वेणुगोपाल ने इंडिया गठबंधन की अन्य पार्टियों से कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति को देखते हुए तत्परता से फैसला लिया। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि सहयोगी दलों को पूर्व में जानकारी न देने के कारण अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हुई। कुछ विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग के खिलाफ था, तो कांग्रेस नेताओं को आयोग से मिलने की आवश्यकता क्यों थी।


विपक्ष का मार्च

मंगलवार को विपक्ष के लगभग 200 सांसद संसद के मकर द्वार पर एकत्रित हुए और एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च किया। दिल्ली पुलिस ने चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया था। जब विपक्ष का मार्च आकाशवाणी भवन पहुंचा, तो समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई वरिष्ठ सांसदों को हिरासत में लिया गया। उन्हें बसों में बिठाकर पुलिस स्टेशन ले जाया गया।


कांग्रेस का अचानक निर्णय

कांग्रेस के इस निर्णय ने विपक्ष को चौंका दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा आकाशवाणी भवन में घंटों तक धरने पर बैठे रहे। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी की योजना थी कि वे आकाशवाणी भवन के पिछले गेट से बाहर निकलकर चुनाव आयोग के दफ्तर के सामने पहुंचें, लेकिन जब पुलिस ने उस गेट को बंद कर दिया तो उन्होंने वहीं धरना देने का निर्णय लिया। कांग्रेस नेताओं को देर शाम हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया, जबकि अब FIR भी दर्ज की जा चुकी है।


सहयोगी दलों की जानकारी की कमी

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि आकाशवाणी भवन में धरना देने का यह निर्णय अचानक लिया गया था। एक कांग्रेस नेता ने कहा, "कांग्रेस नेताओं को इस विरोध प्रदर्शन के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी, इसलिए सहयोगी दलों को भी इसकी सूचना नहीं मिली।" एक अन्य नेता ने कहा, "हम इसकी कल्पना कैसे कर सकते थे? अन्य दलों के सांसद वापस आ सकते थे और उनमें से कुछ आए भी। कांग्रेस ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चलें।"


पिछले अनुभवों की पुनरावृत्ति

यह पहला अवसर नहीं है जब कांग्रेस ने सहयोगी दलों को सूचित करने में लापरवाही दिखाई है। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान भी ऐसा ही हुआ था, जब पेपर लीक मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर राहुल गांधी के धरने की योजना के बारे में सहयोगी दलों को नहीं बताया गया था।