केजरीवाल की मांग से आगे निकली मोदी सरकार
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में मिडिल क्लास के लिए 7 प्रमुख मांगें रखते हुए इनकम टैक्स छूट की सीमा को 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग की थी। उन्होंने इस बजट को मिडिल क्लास के नाम समर्पित करने की अपील भी की थी। लेकिन मोदी सरकार ने इससे आगे बढ़ते हुए 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स मुक्त करने का फैसला किया, जो केजरीवाल की मांग से 2 लाख रुपये अधिक है।
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि नई आयकर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पूरी तरह से टैक्स मुक्त होगी। इसके साथ ही नौकरीपेशा लोगों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलेगा, जिससे 12.75 लाख रुपये तक की आय पर भी टैक्स नहीं देना होगा। यह कदम मिडिल क्लास को आर्थिक राहत प्रदान करने और उनकी बचत को बढ़ाने में सहायक होगा।
आयकर स्लैब में बड़ा बदलाव
इसके अलावा, वित्त मंत्री ने नई कर व्यवस्था के तहत टैक्स स्लैब में बदलाव की घोषणा की, जिससे करदाताओं को और अधिक राहत मिलेगी। अब नई व्यवस्था इस प्रकार होगी:
- - 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं।
- - 4 लाख से 8 लाख रुपये तक की आय पर 5% टैक्स।
- - 8 लाख से 12 लाख रुपये तक की आय पर 10% टैक्स।
- - 12 लाख से 16 लाख रुपये तक की आय पर 15% टैक्स।
- - 16 लाख से 20 लाख रुपये तक की आय पर 20% टैक्स।
- - 20 लाख से 24 लाख रुपये तक की आय पर 25% टैक्स।
- - 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30% टैक्स।
दिल्ली में चुनावी असर
दिल्ली में मिडिल क्लास का एक बड़ा वर्ग है, जो लंबे समय से इनकम टैक्स में छूट की मांग कर रहा था। इस वर्ग की जरूरतों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यह घोषणा की है। मिडिल क्लास की इस राहत को दिल्ली चुनाव के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि मिडिल क्लास को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा दिया जाए।
केजरीवाल की ‘मिडिल क्लास मेनिफेस्टो’ पर जवाब
अरविंद केजरीवाल ने कुछ दिनों पहले मिडिल क्लास के लिए एक "मेनिफेस्टो" जारी किया था, जिसमें इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, और शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने जैसी मांगें शामिल थीं। हालांकि, केंद्र सरकार के इस फैसले ने न केवल उनकी मांगों को पूरा किया, बल्कि मिडिल क्लास के हित में और भी बड़ा कदम उठाया। इस बजट में किए गए ऐलान से मिडिल क्लास को कई प्रकार की राहत मिलेगी:
1. आर्थिक बचत: टैक्स छूट बढ़ने से मिडिल क्लास परिवारों की बचत में वृद्धि होगी।
2. वित्तीय स्थिरता: नई कर व्यवस्था सरल और पारदर्शी है, जिससे करदाताओं के लिए योजनाएं बनाना आसान होगा।
3. निवेश के अवसर: बचाई गई धनराशि को मिडिल क्लास परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य, और निवेश में उपयोग कर सकते हैं।
यह घोषणा न केवल आर्थिक सुधार की दिशा में एक कदम है, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। दिल्ली जैसे मेट्रोपॉलिटन शहर में, जहां मिडिल क्लास का बड़ा हिस्सा निवास करता है, यह फैसला भाजपा को एक मजबूत चुनावी बढ़त देने में मदद कर सकता है। बजट 2025-26 में मिडिल क्लास को ध्यान में रखते हुए इनकम टैक्स में दी गई छूट और नई कर व्यवस्था के बदलाव ने आम जनता के बीच उत्साह पैदा किया है। यह कदम मिडिल क्लास के जीवन स्तर को सुधारने और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला है। इससे न केवल दिल्ली चुनावों में भाजपा को बढ़त मिल सकती है, बल्कि देशभर में मिडिल क्लास का भरोसा भी बढ़ेगा।
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