राइडर्स ने स्क्रीनशॉट्स साझा किए जिसमें दिखता है कि राइडर्स को उनकी अपेक्षित कमाई से कम राशि क्रेडिट हुई। राइडर्स के मुताबिक, न तो ऐप पर कोई नोटिफिकेशन आया, न ईमेल या sms के जरिए यह बताया गया कि उनकी मजदूरी में कोई कटौती की जाएगी।

“ना मैसेज, ना नोटिस – सीधा पैसा कम”
दिल्ली-एनसीआर के एक राइडर ओमप्रकाश ने बताया “सुबह अकाउंट देखा तो पेमेंट आधी थी। पहले लगा शायद देर से पूरी आएगी, लेकिन बाद में पता चला कि यही फाइनल है। कोई नोटिस नहीं दिया गया।”
Blinkit डिलीवरी पार्टनर की हड़ताल में ऐसा ही अनुभव कई अन्य राइडर्स ने भी साझा किया। उनका कहना है कि पेमेंट सीधे कम कर दी गई, बिना किसी लिखित जानकारी के। अभिनव बताते हैं यह पहली बार नहीं है डेली ऐसा किया जा रहा है, जब हम कंप्लेन करते है तो बीच में रुक गया था लेकिन आज पेमेंट आई ही नहीं है।
हादसे, इंश्योरेंस और अधूरे दावे


Blinkit डिलीवरी पार्टनर की हड़ताल के दौरान कुछ राइडर्स ने यह भी बताया कि डिलीवरी के दौरान उनके एक्सीडेंट हुए हैं। कंपनी की ओर से इंश्योरेंस कवर होने की बात की जाती है और हेलमेट, ग्लव्स जैसे सेफ्टी गियर भी दिए जाते हैं। लेकिन राइडर्स के अनुसार, दुर्घटना के बाद इंश्योरेंस क्लेम कई मामलों में क्लियर नहीं होते।
एक राइडर ने कहा, रजत (एक्स वर्कर) का मई में राइड पर जाते हुए एक्सीडेंट हुआ था लेकिन इंश्योरेंस क्लेम करने के बाद भी क्लेम नहीं दिया गया। मोलिटिक्स को मिली चैट्स बताती हैं कि रजत ने कई बार कंपनी के साथ बात करने की कोशिश की लेकिन आखिर में उसे कहा गया आप यहां से काम छोड़ चुके है. जिसके बाद उन्हें कम्पनी ने रिस्पांस देना बंद कर दिया।

यह सवाल खड़ा करता है कि जब प्लेटफॉर्म इंश्योरेंस का दावा करता है, तो क्लेम क्लियर न होने की ज़िम्मेदारी किसकी है। इंश्योरेंस कंपनी की या प्लेटफॉर्म की?
अपनी बाइक, अपना पेट्रोल, अपना रिस्क
राइडर्स का कहना है कि वे अपनी बाइक, पेट्रोल, मेंटेनेंस और कई बार सेफ्टी से जुड़ा खर्च खुद उठाते हैं। ऐसे में जब पूरे दिन की कमाई में कटौती होती है, तो कई बार उनका रोज़ का खर्च उनकी आमदनी से ज्यादा हो जाता है।
कुछ राइडर्स ने यह भी बताया कि न्यूनतम कमाई और इंसेंटिव पूरे करने के लिए वे रोज़ 12 से 18 घंटे तक काम करते हैं। आज जब हड़ताल पर बैठे हैं तब धमकी दी गई है कि आपकी ID बंद कर दी जाएगी। डिलीवरी राइडर्स के साझा किए गए स्क्रीनशॉट्स के अनुसार 20 नवंबर को 338 रुपये काट लिए गए ,बावजूद इसके कि खुद blinkit के कस्टमर केयर डिपार्टमेंट ने राइडर को दूसरी लोकेशन पर सही कस्टमर को ऑर्डर देने के लिए कहा था।

कंपनी का पक्ष: गेट बंद, जवाब बंद
Blinkit डिलीवरी पार्टनर की हड़ताल कवर करते हुए जब ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान जब रिपोर्टर ने कंपनी के एक लोकल ऑफिस जाकर जवाब माँगने की कोशिश की, तो अंदर प्रवेश से इनकार कर दिया गया। गेट पर मौजूद सुरक्षा गार्ड ने फोन पर विनीत रावत से बात करवाई। फ्लीट मैनेजर रावत ने कहा “ऑफिस के अंदर एंट्री नहीं है। मीडिया से बात नहीं करेंगे।” और अगर आप नहीं गए तो पुलिस बुला ली जाएगी।
इसी दौरान यह भी बताया गया कि ऑफिस परिसर में केवल पुरुषों को प्रवेश की अनुमति है, महिलाओं को अंदर जाने की इजाज़त नहीं है।
सरकार के नियम: काग़ज़ पर पहचान, ज़मीन पर सुरक्षा नहीं
Blinkit श्रम मुद्दा पहली बार सामने नहीं आया है, इससे पहले भी 2023 में राइडर्स गुरुग्राम में कर चुके हैं। हालाँकि कोई नतीजा सामने नहीं आया. जबकि भारत सरकार ने 2020 में Code on Social Security के ज़रिए गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी रूप से पहचाना था। इस कानून में सरकार को अधिकार दिया गया कि वह गिग वर्कर्स के लिए वेलफेयर स्कीम्स जैसे एक्सीडेंट इंश्योरेंस और हेल्थ बेनिफिट्स शुरू कर सके।
लेकिन यह कानून अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। नतीजतन, गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी नहीं, काम के घंटों की कोई स्पष्ट सीमा नहीं, वेज कट से पहले नोटिस का कोई अनिवार्य नियम नहीं और इंश्योरेंस क्लेम के लिए कोई मजबूत शिकायत तंत्र नहीं यानी गिग वर्कर्स को काग़ज़ पर तो पहचान मिली है, लेकिन ज़मीन पर उनकी सुरक्षा अब भी कंपनियों की आंतरिक नीतियों पर निर्भर है।
इस रिपोर्ट के लिए Blinkit से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई। ईमेल के ज़रिए ब्लिंकिट वेज कट, हड़ताल नीति और इंश्योरेंस क्लेम से जुड़े सवाल भेजे गए। रिपोर्ट प्रकाशित होने तक कंपनी की ओर से कोई लिखित जवाब नहीं मिला।
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