रेड्डी के आरोपों का जवाब
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने वाईआर सदाशिव रेड्डी द्वारा काउंसिल में अपॉइंटमेंट्स में गड़बड़ी, फंड के गलत इस्तेमाल और कामकाज में पारदर्शिता की कमी के आरोपों का कड़ा जवाब दिया है। मिश्रा ने कहा कि रेड्डी अब बार काउंसिल के को-चेयरमैन नहीं हैं और उन्होंने खुद को एक राजनीतिक बदला लेने की कोशिश में शामिल किया है।
मिश्रा ने कहा, 'सबसे पहले, मैं यह स्पष्ट कर दूं कि वह आज स्टेट बार काउंसिल के मेंबर भी नहीं हैं। यह एक डेमोक्रेटिक बॉडी है, जिसमें लोग चुने जाते हैं और आंतरिक राजनीति होती है।' उन्होंने यह भी कहा कि रेड्डी ने पिछले साढ़े आठ सालों में कभी अपनी आवाज नहीं उठाई।
मिश्रा ने दी अपनी स्थिति
मनन कुमार मिश्रा ने आगे कहा, 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया अभी भी एक बहुत मजबूत संस्था है और भविष्य में भी बनी रहेगी। इसलिए, रेड्डी या ABCD जैसे लोगों की बातों का कोई महत्व नहीं है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रेड्डी अब उस ट्रस्ट के बारे में बात कर रहे हैं, जिसके वह स्वयं ट्रस्टी हैं।
मिश्रा ने यह स्पष्ट किया कि बार काउंसिल की स्थिति और ताकत को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब एक राजनीतिक स्टंट का हिस्सा है और रेड्डी की बातें निराधार हैं।
रेड्डी की इस्तीफे की मांग
इससे पूर्व, वाईआर सदाशिव रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा से तुरंत इस्तीफा मांगते हुए कहा था कि उन्हें 15 दिनों के भीतर इस पर कदम उठाना चाहिए। उन्होंने अपनी मांग में काउंसिल के फंड के गलत इस्तेमाल और अन्य गवर्नेंस मामलों की स्वतंत्र जांच की भी मांग की।
रेड्डी ने अपने पत्र में लिखा, 'इस देश का बार अपनी काउंसिल से जो कुछ भी पा रहा है, उससे बेहतर का हकदार है।' उन्होंने बीसीआई की एक स्पेशल मीटिंग और काउंसिल के ट्रस्ट PEARL-First का ऑडिट कराने की भी मांग की है।





