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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’! देशभर में फैले नेटवर्क पर लगाम क्यों नहीं?

क्या गैंगस्टर अब ‘साहब’ हो गए हैं?

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’! देशभर में फैले नेटवर्क पर लगाम क्यों नहीं?
फोटो: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’! देशभर में फैले नेटवर्क पर लगाम क्यों नहीं?

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग से लेकर सिद्धू मूसेवाला और बाबा सिद्दीकी की हत्या तक, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी हुई। टाइगर सुरक्षित रहे, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। इसके बाद अनिल पंडित ने बिश्नोई गैंग के नाम पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सवाल सिर्फ एक अभिनेता की सुरक्षा का नहीं, आम लोगों की सुरक्षा का भी है। आखिर एक दशक से अधिक समय से गंभीर आपराधिक मामलों में चर्चा में रहे इस कथित नेटवर्क पर प्रभावी लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? इसी बीच दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी का लॉरेंस बिश्नोई के लिए ‘साहब’ शब्द इस्तेमाल करना भी चर्चा में आया। अधिकारी ने इसे जुबान फिसलने की घटना बताया, लेकिन सवाल बना हुआ है—एक गैंगस्टर के लिए पुलिस अधिकारी के मुंह से ऐसा संबोधन क्यों निकला?

कौन है लॉरेंस बिश्नोई?

लॉरेंस बिश्नोई पंजाब के फाजिल्का जिले के दुतारांवाली गांव का रहने वाला है। कॉलेज के दिनों में वह छात्र राजनीति से जुड़ा था। बाद में उसका नाम कई आपराधिक मामलों में सामने आया। वह हत्या, हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश, धमकी और रंगदारी जैसे आरोपों का सामना कर चुका है। जांच एजेंसियां उसे एक बड़े आपराधिक गिरोह का कथित सरगना मानती हैं। बिश्नोई के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। अक्टूबर 2024 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी से जुड़ी रिपोर्टिंग में उसके खिलाफ कई राज्यों में दर्ज 84 मामलों का जिक्र किया गया था। वहीं, द इंडियन एक्सप्रेस की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में 2010 से उसके खिलाफ 47 एफआईआर दर्ज हुई थीं। इनमें चार मामलों में उसे दोषी ठहराया गया था।

सलमान खान को धमकी से लेकर टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग तक

लॉरेंस बिश्नोई का नाम सलमान खान को धमकी देने के मामलों में भी सामने आया है। इसकी वजह 1998 के काले हिरण शिकार मामले से जुड़ी बताई जाती है। 2018 में जोधपुर में पेशी के दौरान सलमान को जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसके बाद 14 अप्रैल 2024 को उनके मुंबई स्थित घर के बाहर फायरिंग हुई, जिसमें बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों के दावे सामने आए। अब टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के बाद भी गैंग के नाम पर जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया है। पुलिस को हमलावरों के साथ-साथ साजिश, हथियारों और कथित सहयोगियों की भी जांच करनी होगी। सवाल है कि क्या गैंग के नाम पर डर फैलाने की कोशिशों पर प्रभावी लगाम लग पा रही है?

सिद्धू मूसेवाला की हत्या: गोल्डी बराड़ ने ली थी जिम्मेदारी

29 मई 2022 को पंजाब के मानसा जिले में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या की जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लेने का दावा किया था। गोल्डी बराड़ को लॉरेंस बिश्नोई का करीबी सहयोगी बताया जाता रहा है। मूसेवाला की हत्या ने पंजाब में गैंगवार और हथियारबंद गिरोहों की गतिविधियों को लेकर बड़ी चिंता पैदा की थी। एक लोकप्रिय गायक की दिनदहाड़े हत्या और उसके बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने के दावे ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या अपराधी अब वारदात के साथ-साथ उसका प्रचार करके भी अपना डर फैलाना चाहते हैं?

कनाडा में निज्जर की हत्या में भी अमेरिकी आरोपपत्र में नाम

18 जून 2023 को कनाडा के सरे में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी। जुलाई 2026 में सार्वजनिक अमेरिकी आरोपपत्र में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर इस हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, हत्या के निर्देश जेल से दिए गए थे। इन आरोपों पर न्यायिक फैसला होना बाकी है। यह मामला जेल में बंद आरोपियों के कथित नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध की पहुंच को लेकर सवाल उठाता है। अगर जेल से निर्देश देने या प्रतिबंधित संचार के आरोप साबित होते हैं, तो जेल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

जयपुर में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या

5 दिसंबर 2023 को जयपुर में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद रोहित गोदारा ने जिम्मेदारी लेने का दावा किया, जिसे लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े गिरोहों का करीबी बताया जाता है। इस घटना ने राजस्थान में गैंगों की गतिविधियों और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। जब हत्या के बाद कोई गिरोह जिम्मेदारी लेने का दावा करता है, तो पुलिस के लिए जरूरी है कि वह साजिश, हमलावरों को मिली मदद और दावे की सच्चाई की जांच करे। आखिर अपराधियों में कानून का डर कैसे मजबूत होगा?

बाबा सिद्दीकी की हत्या: डर फैलाने की कोशिश?

12 अक्टूबर 2024 को मुंबई में एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मुंबई पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, सलमान खान से उनकी नजदीकी भी हत्या के संभावित कारणों में शामिल थी। पुलिस ने इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई और अन्य आरोपियों की भूमिका का उल्लेख किया था। बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी लगातार धमकियां मिलने की बात कही थी। इस मामले ने फिर यह सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति को धमकी मिल रही है, तो सुरक्षा एजेंसियां खतरे का आकलन कैसे करती हैं और उसे समय रहते बचाने के लिए क्या कदम उठाती हैं?

साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई पर सवाल क्यों?

लॉरेंस बिश्नोई 10 मई 2023 से साबरमती जेल में बंद है। अगस्त 2025 में गृह मंत्रालय ने उसे जेल से बाहर ले जाने पर लगी पाबंदी एक साल के लिए बढ़ाई थी। उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कराने की व्यवस्था भी सामने आई थी। ऐसे में सवाल है कि जेल में बंद होने के बावजूद उसके गिरोह पर बाहर वारदातों के आरोप कैसे लगते हैं? जांच होनी चाहिए कि संपर्क के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल हुआ और जेल की निगरानी में कोई चूक तो नहीं हुई। लेकिन ठोस सबूत के बिना हर वारदात का जिम्मेदार उसे ठहराना भी सही नहीं है।

जेल की सुरक्षा और निगरानी पर सवाल उठें, तो जवाब जांच से मिलना चाहिए—सिर्फ आरोपों से नहीं।

‘ED पार्टी का दामाद’—केजरीवाल ने केंद्र पर लगाए आरोप

जून 2026 में अरविंद केजरीवाल ने लॉरेंस बिश्नोई को ‘ED पार्टी का दामाद’ कहते हुए केंद्र सरकार पर संरक्षण देने का आरोप लगाया था। लेकिन सवाल जरूरी हैं—बिश्नोई गैंग के कथित नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई, आर्थिक मदद और धमकी देने वालों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हुई? सरकार से जवाब मांगना जरूरी है, लेकिन बिना ठोस सबूत संरक्षण का आरोप लगाना भी सही नहीं।

दिल्ली पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’ क्यों कहा?

अगस्त 2025 में दिल्ली पुलिस के DCP अभिषेक धानिया का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह लॉरेंस बिश्नोई के लिए ‘साहब’ कहते सुनाई दिए। विवाद पर उन्होंने इसे जुबान फिसलने की घटना बताया और कहा कि हाल ही में पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ओमबीर बिश्नोई से मुलाकात के कारण ऐसा हुआ।

सिर्फ एक शब्द से पुलिस की मिलीभगत साबित नहीं होती, लेकिन सवाल जरूर उठता है—क्या यह महज जुबान फिसलना था? पुलिस की जिम्मेदारी अपराधियों पर कार्रवाई करना है, न कि अपनी भाषा से उन्हें कोई खास रुतबा देने का संदेश देना। ऐसे मामलों में पारदर्शिता जरूरी है, क्योंकि सवाल पुलिस पर जनता के भरोसे का है।

जब सरकार सख्ती की बात करती है, तो नतीजे कहां हैं?

देश में गैंगस्टरों के खिलाफ गिरफ्तारियां और अभियान हुए हैं। लेकिन असली सवाल है—इनसे अपराध कितना रुका, गिरोहों का नेटवर्क कितना टूटा और कितने मामलों में अदालत में दोष साबित हुआ? पंजाब से राजस्थान, दिल्ली और मुंबई तक लॉरेंस बिश्नोई या उसके कथित सहयोगियों का नाम कई मामलों में सामने आया है। इसके बावजूद नई वारदातों के बाद फिर उसी गैंग के नाम पर जिम्मेदारी लेने के दावे चिंता बढ़ाते हैं।

साबरमती जेल में बंद होने के बावजूद उसके कथित नेटवर्क पर सवाल उठते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि सरकार सीधे जिम्मेदार है, लेकिन जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उसके नतीजे पारदर्शी होने चाहिए। सोशल मीडिया पर गैंगस्टरों को ताकतवर या बहादुर दिखाना भी खतरनाक है। पुलिस को धमकी और अपराध को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए—बिना सबूत किसी को गैंग का समर्थक ठहराए बिना।

सवाल सिर्फ ‘साहब’ कहने का नहीं, कानून के राज का है

टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के बाद पुलिस की प्राथमिकता हमलावरों की पहचान, गैंग से उनके कथित संबंधों और पूरी साजिश की जांच होनी चाहिए। सिद्धू मूसेवाला, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी और बाबा सिद्दीकी जैसे मामलों में भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया सबूतों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए। लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ी हर वारदात का दोष उसी पर डालना सही नहीं, लेकिन उसके कथित नेटवर्क को लेकर बार-बार उठने वाले सवालों की अनदेखी भी नहीं होनी चाहिए। पुलिस और सरकार को बताना चाहिए कि इस नेटवर्क को तोड़ने और लोगों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। ‘साहब’ विवाद पर भी सवाल जरूरी हैं, लेकिन बिना सबूत किसी अधिकारी की मंशा पर फैसला नहीं सुनाया जा सकता।

आखिर जनता को भरोसा कब होगा कि कोई भी गैंगस्टर कितना भी चर्चित हो, कानून से ऊपर नहीं है?