संजय सिंह ने इस मामले पर आगे कहा, "हमने केवल शिकायत दी है, लेकिन कोई भी अधिकारी कार्रवाई का भरोसा नहीं दे सका है। मुझे अभी यह नहीं पता कि ईडी इस मामले में क्या कदम उठाएगी। हालांकि, मुझे शिकायत की प्राप्ति का प्रमाण पत्र दे दिया गया है।" संजय सिंह का आरोप है कि इस तरह के मामलों में चुनावी रिश्वतखोरी के आरोप और भ्रष्टाचार की गंध आती है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खतरा होता है।
संजय सिंह के आरोप के एक दिन बाद, दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने भी परवेश वर्मा पर नए आरोप लगाए थे। आतिशी ने दावा किया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता परवेश वर्मा ने दिल्ली के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में रहने वाली महिलाओं को 1,100 रुपये की रकम बांटी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन महिलाओं के मतदाता पहचान पत्र की जानकारी भी एकत्र की गई थी, जिससे यह सवाल उठता है कि यह रकम केवल चुनावी लाभ के लिए दी जा रही थी।
हालांकि, परवेश वर्मा ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि यह राशि उनके दिवंगत पिता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा द्वारा स्थापित गैर सरकारी संगठन "राष्ट्रीय स्वाभिमान" के एक अभियान के तहत जरूरतमंद लोगों को बांटी गई थी। उन्होंने कहा, "यह राशि किसी चुनावी लाभ के लिए नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभियान के तहत दी गई थी।"
परवेश वर्मा का यह भी कहना है कि भाजपा ने उन्हें नई दिल्ली सीट से आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने का संकेत दिया है। नई दिल्ली सीट पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल लगातार 2013 से चुनाव जीतते आ रहे हैं, और अब आगामी चुनाव में इस सीट पर तगड़ी लड़ाई होने की संभावना है। कांग्रेस ने इस बार इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को उम्मीदवार बनाया है, जिससे इस सीट पर मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
यह घटनाक्रम दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीति को और भी गर्मा सकता है, खासकर तब जब आरोपों का केंद्र मतदाता रिश्वतखोरी और चुनावी भ्रष्टाचार है। इस मुद्दे पर दोनों पार्टियों के बीच विवाद बढ़ सकता है, और यह देखने वाली बात होगी कि ईडी इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या यह आरोप चुनावी प्रक्रिया में कोई बड़ा असर डाल सकते हैं।





