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बिहार में वोटर लिस्ट का पहला ड्राफ्ट जारी, चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को सौंपी कॉपी

चुनाव आयोग ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत शुक्रवार, 1 अगस्त को मतदाता सूची का पहला संशोधित ड्राफ्ट जारी कर दिया।

बिहार में वोटर लिस्ट का पहला ड्राफ्ट जारी, चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को सौंपी कॉपी
फोटो: बिहार में वोटर लिस्ट का पहला ड्राफ्ट जारी, चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को सौंपी कॉपी
चुनाव आयोग ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत शुक्रवार, 1 अगस्त को मतदाता सूची का पहला संशोधित ड्राफ्ट जारी कर दिया। इस ड्राफ्ट की फिजिकल और डिजिटल कॉपी राज्य के सभी 38 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सौंप दी गई है। 

ECI ने बताया कि शुक्रवार दोपहर 3 बजे से यह ड्राफ्ट आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगा, जहां आम नागरिक इसे देखकर अपना नाम जांच सकते हैं। यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हट गया है या कोई त्रुटि है, तो वे 1 अगस्त से 1 सितंबर तक आपत्ति या सुझाव दर्ज करवा सकते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और प्रत्येक योग्य मतदाता को उसका अधिकार सुनिश्चित करना है।

राजनीतिक दलों के साथ बैठकों का आयोजन करें: चुनाव आयोग


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ बैठकों का आयोजन करें ताकि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर चर्चा हो सके और व्यापक सहमति बन सके। SIR प्रक्रिया को लेकर बीते कुछ महीनों में चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता जागरूकता अभियान भी तेज कर दिया था। ग्रामीण और शहरी इलाकों में विशेष शिविर लगाए गए, जहां लोगों को मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया समझाई गई।

विपक्ष ने जताई नाराज़गी, संसद में हंगामा


हालांकि चुनाव आयोग का दावा है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और समावेशन को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है, लेकिन कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस पर असहमति जताई है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया एकतरफा और पक्षपातपूर्ण तरीके से चलाई जा रही है। संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत में ही इस मुद्दे को लेकर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में भारी हंगामा देखने को मिला, जिससे कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। 

इसी बीच, मतदाता जागरूकता अभियान भी राज्यभर में तेज किया गया है। शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिविरों के ज़रिए मतदाताओं को सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार के तरीकों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।