
आघाड़ी के 40 से ज्यादा वोट फूटे, शिवसेना-राकां में बीजेपी की सेंध, कई कांग्रेसी भी बिके
नागपुर, निज संवाददाता. 10 दिसंबर को हुए विधान परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर थी. शुरू से ही कहा जा रहा था कि ‘लक्ष्मी दर्शन’ वाले इस चुनाव में दोनों ही ओर जमकर वोटरों को अपने पाले में करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाई जाएगी. इस चुनाव में खरीदी-बिक्री से बचाने के लिए भाजपा ने तो अपने सारे के सारे वोटर्स को 10 दिन पहले ही देशभर के विविध स्थानों में पर्यटन के लिए भेज दिया था. वोटिंग के दिन 14 दिसंबर को ही उन्हें मतदान केंद्रों में लाया गया लेकिन कांग्रेस ने अपने सारे वोटर्स को यहीं खुला छोड़ रखा था. तभी से यह कयास लगने शुरू हो गये थे कि भाजपा आसानी से सेंध लगा सकती है. हालत यह थी कि भाजपाइयों को पर्यटन पर भेजे जाने के बाद कांग्रेस-राकां और शिवसेना के वोटर्स भी अपने नेताओं की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे थे कि उन्हें भी पर्यटन के लिए भेजा जाएगा लेकिन कांग्रेस ने उन्हें यूं ही छोड़ दिया था. अब जब परिणाम आए हैं तो यह साफ हो गया है कि भाजपा अपने पास जितने वोट होने का दावा कर रही थी उससे उसे 44 वोट अधिक मिले हैं. मतलब जमकर क्रॉस वोटिंग हुई है. और यह तो सर्वविदित है कि बिना ‘दाम’ के कोई वोटर फूटता नहीं है. नागपुर सीट पर आघाड़ी के 44 वोट फूटने का दावा भाजपाई कर रहे हैं.
कांग्रेसी लगा रहे घोड़ा-बाजारी के आरोप
‘अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गईं खेत’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए अब कांग्रेसी नेता भाजपा पर घोड़ा-बाजारी करने का आरोप लगा रहे हैं. भाजपा ने दावा किया था कि उसके पास 318 वोट हैं लेकिन उसके उम्मीदवार चंद्रशेखर बावनकुले को 362 पहली पसंदी के वोट हासिल हुए हैं. मतलब 44 वोट अधिक. भाजपा नेताओं का कहना है कि महाविकास आघाड़ी के नेताओं से उनके ही कार्यकर्ता इतने नाराज हैं कि उन्होंने भाजपा को वोट देना उचित समझा. उनका कहना है कि कांग्रेस के पास कोई अपना उम्मीदवार नहीं था तो भाजपा से नगरसेवक को तोड़कर उम्मीदवार बनाया और फिर उस पर अविश्वास कर निर्दलीय को समर्थन दे दिया. मतलब कांग्रेस को अपने अधिकृत उम्मीदवार पर भी भरोसा नहीं था जिसके चलते क्रॉस वोटिंग हुई.
तीनों पार्टियों में लगाई सेंध
दावा किया जा रहा है कि भाजपा ने मविआ की तीनों पार्टियों में सेंध लगाई है. राकां के पास 20 और शिवसेना के पास 25 वोटर्स हैं. हालत यह थी कि कांग्रेस ने अपनी दोनों सहयोगी पार्टियों को अपने हाल पर छोड़ दिया था. वोटरों से संपर्क तक नहीं किया गया. ग्रामीण भागों में राकां के कुछ वोटर्स तो अपने नेताओं का आदेश-निर्देश नहीं मिलने से भी नाराज थे. ‘लक्ष्मी दर्शन’ वाले चुनाव में वोटरों को कुछ मिलने की आस रहती है. समझा जा रहा है कि जब उन्हें अपनी पार्टी से कुछ भाव नहीं मिला तो भाजपा को सेंध लगाने का मौका मिल गया. राकां व शिवसेना में तो सेंध लगाई ही, साथ ही कई कांग्रेसी वोट भी बिकने की चर्चा है. ग्रामीण में ही नहीं, सिटी में भी कुछ कांग्रेसियों के वोट भाजपा को पड़ने की चर्चा है. कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए गए छोटू भोयर को पार्टी द्वारा निर्दलीय को समर्थन देने की घोषणा के बाद केवल 1 वोट ही हासिल हुआ. भोयर का दावा है कि भाजपा ने 334 वोटरों को पर्यटन पर भेजा था इस हिसाब से उसने 18 वोट फोड़े हैं. अब ये वोट किस पार्टी के हैं यह खोज का विषय है.
कांग्रेसी लगा रहे घोड़ा-बाजारी के आरोप
‘अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गईं खेत’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए अब कांग्रेसी नेता भाजपा पर घोड़ा-बाजारी करने का आरोप लगा रहे हैं. भाजपा ने दावा किया था कि उसके पास 318 वोट हैं लेकिन उसके उम्मीदवार चंद्रशेखर बावनकुले को 362 पहली पसंदी के वोट हासिल हुए हैं. मतलब 44 वोट अधिक. भाजपा नेताओं का कहना है कि महाविकास आघाड़ी के नेताओं से उनके ही कार्यकर्ता इतने नाराज हैं कि उन्होंने भाजपा को वोट देना उचित समझा. उनका कहना है कि कांग्रेस के पास कोई अपना उम्मीदवार नहीं था तो भाजपा से नगरसेवक को तोड़कर उम्मीदवार बनाया और फिर उस पर अविश्वास कर निर्दलीय को समर्थन दे दिया. मतलब कांग्रेस को अपने अधिकृत उम्मीदवार पर भी भरोसा नहीं था जिसके चलते क्रॉस वोटिंग हुई.
तीनों पार्टियों में लगाई सेंध
दावा किया जा रहा है कि भाजपा ने मविआ की तीनों पार्टियों में सेंध लगाई है. राकां के पास 20 और शिवसेना के पास 25 वोटर्स हैं. हालत यह थी कि कांग्रेस ने अपनी दोनों सहयोगी पार्टियों को अपने हाल पर छोड़ दिया था. वोटरों से संपर्क तक नहीं किया गया. ग्रामीण भागों में राकां के कुछ वोटर्स तो अपने नेताओं का आदेश-निर्देश नहीं मिलने से भी नाराज थे. ‘लक्ष्मी दर्शन’ वाले चुनाव में वोटरों को कुछ मिलने की आस रहती है. समझा जा रहा है कि जब उन्हें अपनी पार्टी से कुछ भाव नहीं मिला तो भाजपा को सेंध लगाने का मौका मिल गया. राकां व शिवसेना में तो सेंध लगाई ही, साथ ही कई कांग्रेसी वोट भी बिकने की चर्चा है. ग्रामीण में ही नहीं, सिटी में भी कुछ कांग्रेसियों के वोट भाजपा को पड़ने की चर्चा है. कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए गए छोटू भोयर को पार्टी द्वारा निर्दलीय को समर्थन देने की घोषणा के बाद केवल 1 वोट ही हासिल हुआ. भोयर का दावा है कि भाजपा ने 334 वोटरों को पर्यटन पर भेजा था इस हिसाब से उसने 18 वोट फोड़े हैं. अब ये वोट किस पार्टी के हैं यह खोज का विषय है.




























































