
आंकड़े बताते हैं कि भरभराकर ढह चुकी अर्थव्यवस्था, लेकिन 'मन की बात' में इसका जिक्र नहीं होता- पत्रकार
- अर्थव्यवस्था में जनवरी 2018 से लगातार गिरावट देखा जा रहा है, कोरोना महामारी के आने के बाद से अर्थव्यवस्था में वृद्धि पूरी तरह रुक गई है।
- इस मुद्दे पर गुजराती मूल के पत्रकार आकार पटेल ने कहा- हमें ये सोचना चाहिए कि क्यों बांग्लादेश के आम नागरिक के मुकाबले भारत का आम नागरिक गरीब क्यों है।
- उन्होंने कहा- अप्रैल 2021 तक मैन्यूफैक्चरिंग, ट्रेड, ट्रासंपोर्ट और कम्यूनिकेशन गिरकर 2018 के स्तर पर पहुंच चुका था। यानी तीन साल का सीधा नुकसान।
- सीमेंट, रिफाइनरी, स्टील जैसे कोर उद्योग, कार सहित पैसेंजर वाहनों की बिक्री, दो पहिया वाहनों की बिक्री, आदि की बिक्री आज उस स्तर पर है जो 5-6 साल पहले थी।
- उन्होंने कहा- जीडीपी ग्रोथ 6 साल के निचले स्तर पर है, लेकिन इससे निपटने के लिए सरकार के पास कोई रणनीतिक दृष्टि नहीं है, 'मन की बात' में इसका जिक्र नहीं होगा।




























































