
दिल्ली दंगाः छात्र कार्यकर्ताओं के मामले में दिल्ली पुलिस ने नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत का उल्लंघन किया
- सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने दिल्ली पुलिस को दिल्ली दंगे को लेकर सख्त टिप्पणी की है।
- उन्होंने कहा- सीएए विरोधी छात्र कार्यकर्ताओं के मामले में पुलिस ने हर कदम पर नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत का उल्लंघन किया है।
- उन्होंने कहा- जिस तरह से देवांगना को 24 मई 2020 को एक वर्चुअल कोर्ट रूम से गिरफ्तार किया गया, वह भारतीय न्यायिक इतिहास में कभी नहीं हुआ था।
- उन्होंने हालात कि तुलना अमिताभ बच्चन की फिल्म शहंशाह से की जिसमें खलनायक को ‘गलती से’ एक अदालत के अंदर फांसी पर लटका दिया जाता है।
- पूर्व न्यायाधीश ने कहा- हमारे संविधान में, शांतिपूर्ण विरोध की इजाजत दी गयी है, संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (बी) के तहत यह एक मौलिक अधिकार है।




























































