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IDBI बैंक निजीकरण: ₹52,878 करोड़ की डील पर उठे सवाल, जानें क्या है पूरा मामला

IDBI बैंक में सरकार और LIC की 60.72% हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स को बेचे जाने के फैसले पर विवाद गहराया।

IDBI बैंक निजीकरण: ₹52,878 करोड़ की डील पर उठे सवाल, जानें क्या है पूरा मामला
फोटो: IDBI Bank Privatisation, Fairfax Financial Holdings, Prem Watsa, LIC Government Stake, Bank Employees Protest

जयपुर/नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की कुल 60.72% हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने की मंजूरी दे दी है। यह सौदा ₹52,878 करोड़ में तय हुआ है। इस बिक्री के बाद बैंक में सरकार की हिस्सेदारी घटकर 15% और LIC की 19% रह जाएगी, जिससे बैंक का पूरा प्रबंधन और मालिकाना हक फेयरफैक्स के पास चला जाएगा।

 

DFI से निजीकरण तक का सफर

1 जुलाई 1964 को डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट (DFI) के रूप में शुरू हुए IDBI का मुख्य काम देश के औद्योगिकीकरण के लिए बड़े उद्योगों, बिजली परियोजनाओं और कारखानों को कर्ज देना था। इसने सिडबी (SIDBI), NSE और NSDL जैसी बड़ी संस्थाएं खड़ी करने में अहम भूमिका निभाई।

अक्टूबर 2004 में इसे एक आम वाणिज्यिक बैंक में बदल दिया गया। हालांकि, उद्योगों को दिए गए कर्ज वापस न आने से मार्च 2018 तक इसका NPA ₹55,588 करोड़ (कुल कर्ज का 28%) तक पहुंच गया। बैंक को उबारने के लिए सरकार और LIC ने 2015 से 2019 के बीच लगभग ₹42,781 करोड़ का निवेश किया।

कड़े प्रयासों के बाद वित्तीय वर्ष 2026 में बैंक ने ₹9,513 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया और इसकी कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो सुधरकर 26.65% हो गई।

 

कम कीमत और पारदर्शिता पर सवाल

मुनाफे में आने के बावजूद बैंक को बेचने की प्रक्रिया पर विवाद खड़ा हो गया है:

  1. रिजर्व प्राइस से कम कीमत: सरकार ने पहले जिस रिजर्व प्राइस (94.42% शेयर) से कम पर बेचने से इनकार किया था, उससे करीब 14% कम कीमत पर यह डील तय की गई।

  2. बाजार भाव से छूट: फेयरफैक्स ₹81 प्रति शेयर की बोली लगा रही है, जबकि मंजूरी के दिन शेयर का बाजार भाव ₹90.4 था।

  3. पारदर्शिता का अभाव: 'दीपम' (DIPAM) ने गोपनीयता का हवाला देते हुए दूसरी बोली लगाने वाली कंपनियों के नाम और मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है।

 

कर्मचारियों का विरोध और आरक्षण पर संकट

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने इस सौदे की जांच IRDAI से कराने की मांग की है। बैंक के 20,693 कर्मचारियों में से लगभग 51% कर्मचारी SC, ST, OBC और EWS वर्ग से आते हैं। निजीकरण के बाद बैंक में मिलने वाले आरक्षण के ढांचे और मौजूदा कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। इसके विरोध में बैंक अधिकारी और कर्मचारी 2 और 3 नवंबर को देशव्यापी भूख हड़ताल करने जा रहे हैं।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर- https://youtu.be/HbTfJKvqXeo?si=6-1fKwfLdCWdA5e7

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