राजनीतिक संकट का सामना कर रही UDP
मेघालय के राजनीतिक परिदृश्य में एक समय खुद को किंगमेकर मानने वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) अब गंभीर संकट में है। पार्टी के नेताओं के लगातार पार्टी छोड़ने के कारण उसकी स्थिति काफी कमजोर हो गई है। हाल ही में, UDP के 12 में से 11 विधायकों के बाहर होने के बाद, पार्टी के अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ने कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
मेटबाह लिंगदोह, जो कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) सरकार में एक साल से अधिक समय तक मंत्री रहे, ने अपने इस्तीफे में बताया कि राजनीतिक हालात में बदलाव आ चुका है।
मंत्री पद से इस्तीफे का कारण
मेटबाह लिंगदोह ने अपने इस्तीफे के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि अब उनकी पार्टी के पास केवल एक विधायक बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 8 विधायक भाजपा में और 3 विधायक एनपीपी में शामिल हो चुके हैं, जिससे उनके लिए मंत्री बने रहना असंभव हो गया था।
उन्होंने कहा, "मौजूदा राजनीतिक हालात के कारण UDP के 11 विधायक पार्टी छोड़कर चले गए हैं और अब मैं अकेला विधायक रह गया हूं। इसलिए मैंने तय किया है कि मैं MDA सरकार में कैबिनेट मंत्री नहीं रह सकता। आज मैंने मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मेरा इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। यह पार्टी का पहला फैसला है। इसके बाद और भी फैसले लिए जाएंगे।"
UDP की चुनावी सफलता और वर्तमान स्थिति
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी ने 2023 के विधानसभा चुनावों में 12 सीटें जीतकर खासी-जयंतिया हिल्स क्षेत्र में सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था। हालांकि, तीन साल के भीतर विधायकों के बड़ी संख्या में पार्टी छोड़ने का सिलसिला अब उसके अस्तित्व को संकट में डाल रहा है।
UDP के वर्तमान संकट को देखते हुए राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी को अपने संगठनात्मक ढांचे और रणनीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता है, ताकि उसे अपनी खोई हुई स्थिति को पुनः प्राप्त किया जा सके।





