इसके बाद, डब्ल्यूटीसी ग्रुप की आंतरिक जांच के बाद, डब्ल्यूटीसीए इस नतीजे पर पहुंचा कि उनके सहयोगियों ने लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियमों का उल्लंघन किया है, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीसीए, एक गैर-लाभकारी और गैर-राजनीतिक संगठन है, जो दुनियाभर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के संस्थान स्थापित करने में मदद करता है, लेकिन वह इन परियोजनाओं के विकास या वित्तपोषण में शामिल नहीं है।
डब्ल्यूटीसीए के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी संस्था न तो डब्ल्यूटीसी नोएडा या किसी अन्य लाइसेंसधारी की रियल एस्टेट विकास परियोजनाओं का हिस्सा है और न ही किसी रूप में उनके प्रबंधन, हिस्सेदारी या संचालन में संलग्न है। डब्ल्यूटीसीए के तत्वावधान में लगभग 100 देशों और क्षेत्रों में 300 से अधिक व्यापारिक संगठन और संस्थाएं काम कर रही हैं, और यह संस्था इन संस्थाओं के लिए मानक स्थापित करती है।
इससे पहले, ईडी ने 27 फरवरी को डब्ल्यूटीसी ग्रुप और भूटानी ग्रुप के खिलाफ धन शोधन रोधक अधिनियम के तहत तलाशी अभियान चलाया था। ईडी ने अपनी जांच में हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति की पहचान की थी। यह कार्रवाई डब्ल्यूटीसी ग्रुप और उसके प्रवर्तकों आशीष भल्ला, सुपर्णा भल्ला, और अभिजीत भल्ला, और भूटानी ग्रुप के प्रवर्तक आशीष भूटानी के खिलाफ की गई। इन पर दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में कई स्थानों पर छापे मारे गए थे।
इस तलाशी अभियान के दौरान, डब्ल्यूटीसी के कई प्रमुख केंद्रों, जैसे डब्ल्यूटीसी लखनऊ, डब्ल्यूटीसी नोएडा, डब्ल्यूटीसी नोएडा सीबीडी, डब्ल्यूटीसी पटना, डब्ल्यूटीसी अहमदाबाद, डब्ल्यूटीसी अमृतसर, डब्ल्यूटीसी भोपाल, डब्ल्यूटीसी चंडीगढ़, डब्ल्यूटीसी फरीदाबाद, डब्ल्यूटीसी गिफ्ट सिटी, डब्ल्यूटीसी सूरत, डब्ल्यूटीसी वडोदरा और डब्ल्यूटीसी वाराणसी, को भी इस जांच के दायरे में रखा गया है।
यह मामला न केवल डब्ल्यूटीसी ग्रुप और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ चल रही जांच से संबंधित है, बल्कि इससे जुड़ी परियोजनाओं और उनके भविष्य पर भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
डब्ल्यूटीसीए की ओर से यह निर्णय इस बात को स्पष्ट करता है कि संगठन अपने मानकों और नियमों की किसी भी तरह की अनदेखी को सहन नहीं करेगा और ब्रांड की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाएगा। इसके साथ ही, जांच एजेंसियों ने अब इस पूरे मामले में व्यापक जांच के लिए कदम उठाए हैं, ताकि किसी भी तरह के धोखाधड़ी और विश्वासघात के मामले को हल किया जा सके।
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