आदेश में यह भी कहा गया है कि विशेष सचिव निरीक्षण कार्य की निगरानी करेंगे, ताकि सभी कार्य समय पर और सही तरीके से पूरे हो सकें।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने कहा कि जिन फ्लाईओवरों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है, उनमें एंड्रयूज गंज, गोकुलपुरी, जखीरा, तिलक नगर, ओल्ड पंजाबी बाग, राजा गार्डन और शादीपुर फ्लाईओवर शामिल हैं। शादीपुर फ्लाईओवर दिल्ली का सबसे पुराना फ्लाईओवर है, जिसे विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। वहीं, सरिता विहार फ्लाईओवर की मरम्मत पहले से चल रही है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि ये सभी फ्लाईओवर कम से कम एक दशक पुराने हैं और निर्माण के बाद से इनमें किसी प्रकार का प्रमुख मरम्मत कार्य नहीं किया गया है।
इन फ्लाईओवरों की मरम्मत में बियरिंग्स और अपर कंक्रीट लेयर में बदलाव के साथ-साथ एक्सपेंशन जॉइंट को बदलने जैसे कार्य शामिल होते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, कंक्रीट के स्लैब में तापमान में बदलाव के कारण सिकुड़न और फैलाव की प्रक्रिया होती है, जिससे दरारें आ जाती हैं। इन दरारों के कारण एक्सपेंशन जॉइंट को बदला जाता है, जो कंक्रीट को फैलने और सिकुड़ने के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करता है। यह लोहे का जोड़ कंक्रीट स्लैब के बीच लगाया जाता है, जो कंक्रीट को नुकसान से बचाने के साथ-साथ वाइब्रेशन को भी अवशोषित करता है, ताकि फ्लाईओवर की संरचना मजबूत बनी रहे।
टीमों को हर फ्लाईओवर का नाम, स्थान, उसकी साफ-सफाई, टाइलिंग, पेंटिंग, लाइटिंग, अतिक्रमण की स्थिति और किसी भी अन्य समस्या की जानकारी देनी होगी। यदि निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की चिंता उत्पन्न होती है, तो टीमों को संबंधित समस्याओं की तस्वीरें खींचकर रिपोर्ट में संलग्न करनी होंगी।
प्रत्येक टीम में एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और दो असिस्टेंट इंजीनियर शामिल होंगे, ताकि निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता प्राप्त हो सके। 1 से 5 नंबर वाली टीमों को क्रमशः 23, 17, 22, 19 और 21 फ्लाईओवर आवंटित किए गए हैं, जो उन क्षेत्रों में स्थित हैं जहां सबसे अधिक मरम्मत की आवश्यकता है। इन फ्लाईओवरों के निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार कर पीडब्ल्यूडी सचिवालय को भेजी जाएगी, ताकि अगले चरण की कार्यवाही की जा सके।
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