Molitics Logo
होम सुबह 4 बजे तक क्यों चलती रही संसद? वक्फ बिल के बाद अमित शाह ने किस मुद्दे पर दी सफाई

सुबह 4 बजे तक क्यों चलती रही संसद? वक्फ बिल के बाद अमित शाह ने किस मुद्दे पर दी सफाई

राष्ट्रपति शासन की पुष्टि को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा। कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मणिपुर में पिछले दो वर्षों |

सुबह 4 बजे तक क्यों चलती रही संसद? वक्फ बिल के बाद अमित शाह ने किस मुद्दे पर दी सफाई
फोटो: सुबह 4 बजे तक क्यों चलती रही संसद? वक्फ बिल के बाद अमित शाह ने किस मुद्दे पर दी सफाई
राज्यसभा में गुरुवार की देर रात तक वक्फ (संशोधन) विधेयक पर लंबी बहस चली, लेकिन संसद की कार्यवाही यहीं नहीं रुकी। चर्चा का दौर शुक्रवार तड़के करीब चार बजे तक जारी रहा, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पुष्टि से जुड़े सांविधिक संकल्प पर बयान दिया। गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, दो महीने के भीतर संसद से इसकी पुष्टि कराना जरूरी होता है। इसी क्रम में गृहमंत्री शाह ने राज्यसभा में यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।

विपक्ष का विरोध, सरकार पर विफलता का आरोप


राष्ट्रपति शासन की पुष्टि को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा। कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मणिपुर में पिछले दो वर्षों से जारी हिंसा को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। कांग्रेस का कहना था कि यह स्थिति सरकार की प्रशासनिक नाकामी का परिणाम है। गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करना किसी राजनीतिक चाल का हिस्सा नहीं था। 

उन्होंने कहा, “हमने सरकार गिराने के लिए राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया, जैसा कि कांग्रेस करती थी। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 11 फरवरी को इस्तीफा दिया, लेकिन किसी भी दल ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया। न ही किसी अविश्वास प्रस्ताव की सूचना थी। ऐसे में संवैधानिक विकल्प के तहत यह फैसला लिया गया।” अमित शाह ने यह भी बताया कि बीरेन सिंह के इस्तीफे से पहले और उसके बाद लंबे समय तक राज्य में कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई है। 

उन्होंने कहा कि मणिपुर के दोनों प्रमुख समुदायों के बीच जल्द ही दिल्ली में एक और शांति बैठक आयोजित की जाएगी। शाह ने विपक्ष को चेताते हुए कहा, “राजनीतिक बयानबाजी मणिपुर में हिंसा से प्रभावित लोगों के जख्म नहीं भर सकती। समाधान केवल संवाद और समझदारी से निकलेगा।” उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों समुदाय शांति की दिशा में आगे बढ़ेंगे। मणिपुर में पिछले दो वर्षों से बहुसंख्यक मेइती और आदिवासी कुकी समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है। यह संघर्ष क्षेत्रीय पहचान, आरक्षण और भूमि अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था, जो समय के साथ हिंसक झड़पों और सांप्रदायिक तनाव में बदल गया।