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अमेरिका ने यूक्रेन से मुंह फेरा तो यूरोप साथ देने के लिए आगे आया, कीव में डाला डेरा

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण और नया मोड़ देखने को मिल रहा है। पश्चिमी देशों की नाराज़गी के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति |

अमेरिका ने यूक्रेन से मुंह फेरा तो यूरोप साथ देने के लिए आगे आया, कीव में डाला डेरा
फोटो: Ukraine, Europe, America turned
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण और नया मोड़ देखने को मिल रहा है। पश्चिमी देशों की नाराज़गी के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं, और खासकर यूरोप अब खुलकर यूक्रेन को संकट के दौरान मजबूती से समर्थन देने के लिए सामने आ रहा है। यूरोपीय देशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के दबाव में आकर अपने रणनीतिक हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। इस बीच, यूरोपीय नेताओं ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ एक मजबूत ढाल के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से कीव में कदम रखा है, जिससे उनकी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम यूक्रेन के लिए एक अहम समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, जो यूरोपीय देशों के लिए अपने भविष्य की सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक है। हाल ही में, ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए एकतरफा पहल शुरू की है। 

ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब में रूसी अधिकारियों से मुलाकात की और अब कीव में अपने दूत भेजकर यूक्रेन पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इस प्रक्रिया में न तो यूक्रेन को शामिल किया गया है और न ही यूरोप को, जिससे यूरोपीय नेताओं में चिंता बढ़ गई है। वे अब यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि युद्ध को जल्द खत्म किया जाना चाहिए, लेकिन उनकी शर्तों में यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता और नाटो में शामिल होने की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे यूरोपीय देशों में न केवल नाराजगी बल्कि असंतोष भी बढ़ता जा रहा है, क्योंकि वे यूक्रेन की क्षेत्रीय संप्रभुता को महत्वपूर्ण मानते हैं और इसे किसी भी शांति वार्ता से बाहर रखने के खिलाफ हैं। इस महीने, खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की, जिसमें दोनों नेताओं ने शांति वार्ता पर सहमति जताई, लेकिन इस वार्ता में यूक्रेन और यूरोपीय नेताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। इस पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा, "यूक्रेन के बिना यूक्रेन पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है, और यूरोप को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि यूरोप की सुरक्षा से जुड़े निर्णय लिए जा रहे हैं।" 

इसके बाद, यूरोपीय नेताओं ने इस मुद्दे पर आपातकालीन बैठकें शुरू कर दीं, और 17 फरवरी को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पेरिस में यूरोपीय नेताओं को एक शिखर बैठक के लिए आमंत्रित किया, ताकि इस संकट का समाधान निकालने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें। इसके बाद अगले ही दिन, अमेरिकी और रूसी राजनयिकों ने सऊदी अरब में मुलाकात की, जिसमें यूरोपीय देशों और यूक्रेन को बाहर रखा गया। ट्रंप और जेलेंस्की के बीच अब तीखी बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो गया है। ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति को "तानाशाह" करार दिया और आरोप लगाया कि यूक्रेन ने ही रूस के साथ युद्ध की शुरुआत की। इसके जवाब में जेलेंस्की ने कहा कि ट्रंप रूस के "दुष्प्रचार" के प्रभाव में हैं और उनकी नीतियां यूक्रेन के लिए खतरनाक हो सकती हैं। दोनों नेताओं के बीच बढ़ते इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया विवाद उत्पन्न किया है, जिससे यूरोप और अमेरिका के रिश्तों पर भी असर पड़ रहा है। यूरोपीय संघ (ईयू) अब यूक्रेन को 20 अरब यूरो (लगभग 21 अरब डॉलर) की सैन्य सहायता देने की योजना पर काम कर रहा है, जिसमें मिसाइलों, तोपों जैसी सैन्य सामग्री और नकद सहायता भी शामिल होगी। 

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास इस योजना को आगे बढ़ा रही हैं, और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने 6 मार्च को ब्रसेल्स में एक आपातकालीन बैठक बुलाने का ऐलान किया है। कोस्टा ने कहा, "हम यूरोप और यूक्रेन की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।" इस योजना के तहत, यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को सुरक्षा और सैन्य सहायता देने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है, ताकि रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को मजबूती से खड़ा किया जा सके। ट्रंप की यूक्रेन नीति से यूरोपीय देशों में असंतोष बढ़ रहा है, क्योंकि अमेरिकी प्रशासन अब यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने से पीछे हटने की कोशिश कर रहा है, और चाहता है कि यूरोप इसे संभाले। यूरोपीय देशों का कहना है कि वे रूस और अमेरिका के साथ केवल सैन्य शक्ति की भाषा में बात करने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि यूरोप में सामूहिक सुरक्षा और सहयोग पर आधारित दृष्टिकोण को अधिक महत्व दिया जाता है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस हफ्ते वॉशिंगटन का दौरा करने जा रहे हैं, ताकि ट्रंप को यूक्रेन का समर्थन जारी रखने के लिए मनाया जा सके। 

मैक्रों ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की, जबकि स्टार्मर गुरुवार को उनसे मिलेंगे। इस दौरान, मैक्रों ने एक सोशल मीडिया सत्र में कहा, "मैं ट्रंप से कहूंगा कि आप पुतिन के सामने कमजोर नहीं पड़ सकते। यह आपकी प्रकृति में नहीं है और यह आपके हित में भी नहीं है।" इस बीच, रूस-यूक्रेन युद्ध की तीसरी वर्षगांठ पर कई वैश्विक नेता कीव पहुंचे और यूक्रेन के प्रति अपना समर्थन जताया। इनमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज, लातविया के राष्ट्रपति एडगर्स रिंकेविक्स, लिथुआनिया के राष्ट्रपति गिटानास नौसेदा और एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिखाल शामिल थे। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि अगर अमेरिका पीछे हटता है, तो यूरोपीय संघ को रूस के सामने यूक्रेन को अकेला छोड़ने की स्थिति से बचने के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे। 

 यूरोप अब यूक्रेन को अपनी सुरक्षा की पहली पंक्ति मानते हुए उसे समर्थन देने का संकल्प कर चुका है। आने वाले दिनों में यह युद्ध और वैश्विक राजनीति में निर्णायक मोड़ ला सकते हैं, क्योंकि यूरोपीय नेता अब यूक्रेन के साथ खड़े हैं, जबकि अमेरिका की नीति ने उन्हें असमंजस में डाल दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यूरोप अमेरिका की जगह ले पाएगा, या यूक्रेन को अपने संघर्ष में अकेले ही लड़ना पड़ेगा?

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