TMC की ओर से प्रतिनिधिमंडल से दूरी बनाने के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा,
“विदेश नीति पूरी तरह केंद्र सरकार का विषय है, और वही इसकी जिम्मेदारी ले।”
साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार के प्रयासों का समर्थन करती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी केवल केंद्र पर होनी चाहिए। टीएमसी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा,
“अगर केंद्र सरकार राष्ट्रीय हित में कोई कदम उठाती है, तो TMC उसका समर्थन करेगी। लेकिन किसी प्रतिनिधिमंडल में कौन जाएगा, यह फैसला हर राजनीतिक दल को खुद करना चाहिए, न कि केंद्र सरकार को।”
सरकार के इस अभियान में सभी प्रमुख दलों के नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें बीजेपी के रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, कांग्रेस के शशि थरूर, डीएमके की कनिमोझी, एनसीपी की सुप्रिया सुले, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और जेडीयू के संजय कुमार शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद, एमजे अकबर, सलमान खुर्शीद और आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे, भले ही वे वर्तमान में संसद सदस्य न हों।
यह कूटनीतिक पहल हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि वैश्विक समुदाय को यह संदेश दिया जाए कि भारत आतंकवाद के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति पर कायम है और पाकिस्तान की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब किया जाएगा।





