शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "गुरुवार को लोकसभा में कृषि पर विस्तृत चर्चा होनी थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण यह संभव नहीं हो सका। लोकतंत्र में संवाद और चर्चा ही विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं, लेकिन विपक्ष ने इसे बाधित कर एक तरह से पाप किया है।"
उन्होंने आगे कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। कई योजनाओं के माध्यम से किसानों के हित में लगातार काम किया जा रहा है। ऐसे में विपक्ष का इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा न होने देना निंदनीय है।"
'चर्चा का मार्ग खुला रखें, सार्थक बहस करें'
कृषि मंत्री ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा, "मैं पिछले एक साल से इस चर्चा का इंतजार कर रहा था ताकि विपक्ष भी अपनी राय रख सके और हमें रचनात्मक सुझाव दे सके। हम सकारात्मक सुझावों का हमेशा स्वागत करते हैं। लेकिन अगर विपक्ष इस चर्चा में बाधा डालता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनकी कथनी और करनी में अंतर है। वे वास्तव में किसानों के मुद्दों पर चर्चा करना ही नहीं चाहते।" गुरुवार को लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। डीएमके (DMK) के सांसद नारे लिखी टी-शर्ट पहनकर सदन पहुंचे, जिससे माहौल और गर्मा गया। बार-बार व्यवधान के चलते लोकसभा की कार्यवाही को पहले दोपहर 12 बजे तक, फिर अपराह्न 2 बजे तक और अंततः पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।
सरकार का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन में अराजकता फैला रहा है ताकि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा न हो सके। दूसरी ओर, विपक्ष का तर्क है कि सरकार कुछ संवेदनशील मुद्दों पर बहस से बचना चाहती है।
ऐसे में, संसद का बजट सत्र जिस तरह हंगामे की भेंट चढ़ रहा है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
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