डल्लेवाल ने नवंबर 2024 में अपने किसान साथियों की गिरफ्तारी के बाद अनशन शुरू किया था, जिसका उद्देश्य उनके साथियों की रिहाई और किसान आंदोलन को समर्थन देने का था। उनकी जिद यह थी कि जब तक उनके साथी जेल में हैं, वे पानी और खाना ग्रहण नहीं करेंगे। 4 महीने से अधिक समय तक बिना भोजन और पानी के रहने के बाद, डल्लेवाल की सेहत बहुत खराब हो गई थी। उनकी स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई थी, और यह खबर फैली थी कि उनकी जान को खतरा हो सकता है।
इस दौरान, अस्पताल में उनके जलपान की एक वीडियो भी सामने आई, जिसमें डल्लेवाल अस्पताल के बेड पर लेटे हुए थे और उनके आसपास मौजूद लोग उन्हें हाथ से पानी पिला रहे थे। डल्लेवाल की स्थिति देखकर यह साफ था कि वे अपने संघर्ष के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे और अपने आंदोलन के उद्देश्यों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में यह जानकारी दी गई कि डल्लेवाल ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने इस मौके पर डल्लेवाल की सराहना की और कहा कि वे एक सच्चे किसान नेता हैं, जिन्होंने आंदोलन को एक अलग दिशा दी।
जस्टिस सूर्यकांत ने डल्लेवाल के संघर्ष की सराहना करते हुए उनकी सेहत की कामना की। कोर्ट ने यह भी बताया कि अब हाईवे को खाली कर दिया गया है और किसान वहां से हट गए हैं। इसके अलावा, पंजाब के डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई को भी समाप्त कर दिया गया।
इस दौरान, डल्लेवाल के आंदोलन और उनकी भूख हड़ताल ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सामने लाया, और यह किसान आंदोलन के संघर्ष की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई। उनके अनशन ने न केवल किसानों के मुद्दों को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि वे अपनी मांगों को लेकर कितने दृढ़ और प्रतिबद्ध हैं।
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