अपने पोस्ट में रामगोपाल यादव ने लिखा, "उत्तर भारत के कुछ राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश में, धर्म, जाति और वर्ग के आधार पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, एनकाउंटर हो रहे हैं और संपत्ति जब्त की जा रही है। यही आधार पोस्टिंग में भी देखा जा रहा है। ऐसी ही मानसिकता पर मैंने एक कार्यक्रम में टिप्पणी की थी।" उन्होंने आगे कहा, "कर्नल सोफिया कुरैशी को उनके नाम के आधार पर गाली दी गई। विदेश सचिव मिस्री को भी निशाना बनाया गया। यदि इन लोगों को यह पता चल जाता कि व्योमिका सिंह जाटव हैं और एयर मार्शल अवधेश भारती यादव हैं, तो ये उन्हें भी नहीं बख्शते। आश्चर्य की बात यह है कि मुख्यमंत्री ने बिना पूरा बयान सुने ही ट्वीट कर दिया।"
रामगोपाल यादव ने मुरादाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि यह युद्ध एक मुसलमान, एक जाटव, और एक यादव ने लड़ा है। ये तीनों पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग से आते हैं, तो भाजपा इसे कैसे अपना श्रेय बता सकती है?"
उनकी इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक भूचाल आ गया और उन्हें सेना में जातिवाद घुसाने का दोषी ठहराया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामगोपाल यादव की टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "सेना की वर्दी को जातिवादी चश्मे से नहीं देखा जाता। एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल समाजवादी पार्टी की संकुचित सोच को दर्शाता है, बल्कि यह सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी अपमान है।"





