इस समझौते के तहत, चीन अमेरिकी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाएगा, जबकि अमेरिका चीनी वस्तुओं पर लगभग 30 प्रतिशत कर वसूल करेगा। हालांकि, इन टैरिफ्स को आगामी 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है, जिससे दोनों देशों को वार्ता की मेज़ पर आने का अवसर मिलेगा।
संयुक्त बयान में कहा गया, "दोनों पक्ष इस बात को मानते हैं कि निरंतर वार्ता और संवाद के ज़रिए पारस्परिक चिंता के मुद्दों का समाधान संभव है।"
इन वार्ताओं का नेतृत्व चीन की ओर से स्टेट काउंसिल के वाइस प्रीमियर हे लिफेंग करेंगे, जबकि अमेरिकी पक्ष से ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर प्रतिनिधित्व करेंगे। दोनों पक्षों ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठकें चीन, अमेरिका या किसी तटस्थ तीसरे देश में आयोजित की जा सकती हैं।
टैरिफ नीति पर ट्रंप का रुख बरकरार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान व्यापार घाटे को लेकर दर्जनों देशों पर शुल्क लगाए थे, ने दोबारा स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब पारस्परिकता के सिद्धांत पर काम करेगा।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यदि अन्य देश अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाते हैं, तो अमेरिका भी उसी अनुपात में शुल्क वसूलेगा – चाहे वह चीन हो या भारत।
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि वार्ता विफल होती है तो चीन पर लगने वाले शुल्क 245 प्रतिशत तक बढ़ाए जा सकते हैं, जबकि चीन की ओर से अमेरिका पर अधिकतम 125 प्रतिशत शुल्क प्रस्तावित था। हालांकि, फिलहाल इन संभावित शुल्कों पर विराम लगा दिया गया है।
ट्रंप प्रशासन का यह कदम न केवल अमेरिका-चीन व्यापार तनाव को अस्थायी रूप से टालता है, बल्कि अन्य देशों के साथ भी संतुलित व्यापार व्यवस्था की दिशा में अमेरिका की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।





