वेल्डर संजय शाह, जो इस परियोजना में काम कर रहे थे, ने बताया कि फंसे हुए मजदूर भी उनकी तरह परिवार का पेट पालने के लिए यह जोखिम भरा काम करने को मजबूर थे। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, "हम अक्सर पानी के रिसाव जैसी छोटी घटनाओं के बारे में बात करते हैं, लेकिन यह काम हमारी मजबूरी है।"
कैसे हुआ हादसा? बच निकले मजदूर की आपबीती
संजय शाह उन 50 मजदूरों में शामिल थे जो शनिवार सुबह 7 बजे सुरंग में उतरे थे। लेकिन कुछ ही समय बाद, 13.5 किलोमीटर अंदर सुरंग की छत ढह गई। शाह और 41 अन्य मजदूर किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन आठ मजदूर अंदर ही फंसे रह गए।
शाह ने बताया, “रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों ने हमें सुरंग में पानी के रिसाव की जानकारी दी थी, लेकिन यह आम बात थी, इसलिए हमने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और सावधानी बरतते हुए अंदर गए।”
उन्होंने आगे कहा, “हमें सुरंग में 13 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलने में करीब एक घंटा लगा। वहां पहुंचने के लगभग 15-20 मिनट बाद ही मिट्टी के छोटे-छोटे टुकड़े गिरने लगे। मैं हादसे के स्थान से सिर्फ 20 मीटर दूर था। शिफ्ट इंचार्ज ने हमें हटने को कहा और अलार्म बजा दिया। हम तुरंत भागने लगे। तभी एक तेज़ आवाज़ आई और सुरंग का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। जब हम बाहर आए और उपस्थिति रजिस्टर देखा, तो पता चला कि आठ मजदूर बाहर नहीं निकल सके।”
बचाव दल लगातार मलबा हटाने और अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सुरंग के ढहने से रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है, जिससे अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। सुरंग के अंदर ऑक्सीजन की भी समस्या बनी हुई है, जिससे मजदूरों की जान बचाने की उम्मीदें समय के साथ धुंधली होती जा रही हैं।
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