सीएम स्टालिन पर तीखा हमला
तमिलनाडु भाजपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर हमला बोलते हुए कहा कि तीन-भाषा नीति के खिलाफ सरकार के रुख को जनता का समर्थन नहीं मिला है, इसलिए अब स्टालिन काल्पनिक "हिंदी थोपने" की बहस छेड़ रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि राज्य के मैट्रिकुलेशन स्कूलों में तमिल भाषा को अनिवार्य रूप से नहीं पढ़ाया जाता। उन्होंने स्टालिन से सवाल किया, "क्या आपको पता है कि आपकी पार्टी द्वारा संचालित कई मैट्रिकुलेशन स्कूलों में तमिल अनिवार्य नहीं है और यह सिर्फ एक विकल्प के रूप में पढ़ाई जाती है? आप अब जनता को और बेवकूफ नहीं बना सकते।"
अन्नामलाई ने आगे कहा, "एमके स्टालिन, यह मत भूलें कि भारतीय संविधान का 16वां संशोधन, जिसे अलगाववाद-विरोधी विधेयक के रूप में जाना जाता है, आपकी पार्टी की अलगाववादी विचारधारा पर अंकुश लगाने के लिए लाया गया था। यह उसी पार्टी ने पारित किया था जिसके साथ आप आज गठबंधन में हैं।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तमिलनाडु की सरकार खुद नई शिक्षा नीति (NEP) के कई पहलुओं को लागू कर रही है, बावजूद इसके वह इसके खिलाफ मुखर होकर खड़ी है।
गुरुवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए 1967 के हिंदी विरोधी आंदोलन की याद दिलाई और तमिलनाडु की जनता से हिंदी थोपने के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
स्टालिन ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "1967: अन्ना बैठ गए, तमिलनाडु उठ खड़ा हुआ। अगर गर्वित तमिलनाडु को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो हम जंगल की आग की तरह दहाड़ेंगे। आइए जीत का जश्न मनाएं!"
गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार ने 2020 की नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत प्रस्तावित "तीन-भाषा नीति" का कड़ा विरोध किया है। राज्य सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार इस नीति के माध्यम से हिंदी को जबरदस्ती थोपना चाहती है।
Read This Also:- भाषा विवाद: कर्नाटक में दो भाषा सिद्धांत लागू करने की चर्चा, स्टालिन बोले- ‘हिंदी के अलावा कोई और विशेष भाषा दिवस क्यों नहीं?’
Read This Also:- भाषा विवाद: कर्नाटक में दो भाषा सिद्धांत लागू करने की चर्चा, स्टालिन बोले- ‘हिंदी के अलावा कोई और विशेष भाषा दिवस क्यों नहीं?’





