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"मुर्शिदाबाद हिंसा पर सिंधिया, कहा- शांति बनाए रखने में नाकाम सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं"

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्य सरकार पर कड़ा हमला करते हुए कहा कि अगर कोई राज्य सरकार राज्य में शांति बनाए रखने में असमर्थ है, तो उसे सत्ता में बने रहने |

"मुर्शिदाबाद हिंसा पर सिंधिया, कहा- शांति बनाए रखने में नाकाम सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं"
फोटो: "मुर्शिदाबाद हिंसा पर सिंधिया, कहा- शांति बनाए रखने में नाकाम सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं"
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हिंसा के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्य सरकार पर कड़ा हमला करते हुए कहा कि अगर कोई राज्य सरकार राज्य में शांति बनाए रखने में असमर्थ है, तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने इंदौर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए यह भी कहा, "राज्य सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, और यदि वह शांति सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।"

इसी संदर्भ में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में हाल ही में हुई हिंसा की निंदा की और इसे "मौत का नाच" करार दिया। बोस ने हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में हिंसा का यह सिलसिला बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "बंगाल में जगह-जगह हिंसा अपना भयानक रूप दिखा रही है। हमें हिंसा के पंथ को खत्म करना होगा और इस पर अंतिम क़त्म की कील ठोकनी होगी।" बोस ने यह भी कहा कि यह कदम राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है।

यह हिंसा 11 अप्रैल को वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। इसके अलावा, संपत्ति का भारी नुकसान हुआ और कई परिवारों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रभावित परिवारों में से कई झारखंड के पाकुड़ जिले में शरण लेने गए, जबकि अन्य ने मालदा में स्थापित राहत शिविरों में शरण ली। 

इस पूरे घटनाक्रम पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी ध्यान केंद्रित किया और गुरुवार को आदेश जारी किया कि मुर्शिदाबाद में केंद्रीय बलों की तैनाती कुछ समय के लिए जारी रहेगी। अदालत ने यह भी कहा कि वह पीड़ितों के पुनर्वास और बहाली की प्रक्रिया की निगरानी करेगी। इसके अलावा, अदालत ने राजनीतिक दलों के नेताओं और अधिकारियों को भड़काऊ भाषण देने से भी मना किया, जिससे राज्य में तनाव और हिंसा बढ़ सकती थी।