सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दाखिल की गई है, जिसमें पश्चिम बंगाल में हालिया वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध में भड़की हिंसा को देखते हुए राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा। याचिका में राज्य में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग करते हुए यह भी आग्रह किया गया है कि एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया जाए, जिसकी अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें।
याचिका को सोमवार को न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है।
हालांकि, पीठ ने याचिका पर टिप्पणी करते हुए हल्का तंज भी कसा।
जस्टिस गवई ने कहा,
"आप चाहते हैं कि हम राष्ट्रपति को आदेश जारी करें कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करें? वैसे ही, हम पर कार्यपालिका में अतिक्रमण करने का आरोप लगाया जा रहा है।"
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर कार्यपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी हाल ही में एक फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए उसे 'सुपर संसद' जैसा करार दिया था।
गौरतलब है कि 11-12 अप्रैल को वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में व्यापक हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं। हिंसा के चलते हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। विरोध प्रदर्शनों की आग मालदा, दक्षिण 24 परगना और हुगली जैसे जिलों तक फैल चुकी है, जहां आगजनी, पथराव और सड़क जाम की घटनाएं दर्ज की गईं।
विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है। भाजपा नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने हिंसा की जांच एनआईए से कराने की मांग की है।





