भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने गुरुवार को मस्जिद का निरीक्षण किया था। महज 1 घंटे 10 मिनट में पूरी जांच प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जिसमें उन सभी स्थानों को देखा गया, जहां मुस्लिम पक्ष ने रंगाई-पुताई की मांग रखी थी। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में मस्जिद में किसी भी प्रकार की रंगाई-पुताई की आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की मांग को खारिज कर दिया।
हिंदू पक्ष के विरोध और हाई कोर्ट का फैसला
यह पहला मौका था जब जामा मस्जिद कमेटी ने मस्जिद में रंगाई-पुताई की मांग की थी। हालांकि, हिंदू पक्ष ने इस मांग का पुरजोर विरोध किया। उनका तर्क था कि इससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है। हाई कोर्ट के फैसले से हिंदू पक्ष को राहत मिली है, जबकि मुस्लिम पक्ष को फिलहाल झटका लगा है।
हालांकि, कोर्ट ने मस्जिद में सफाई कार्य की अनुमति दे दी है। सभी पक्षों को मंगलवार तक अपनी दलीलें रखने का समय दिया गया है, जिसके बाद अगली सुनवाई होगी। इसका मतलब यह है कि मुस्लिम पक्ष अगर चाहे तो अतिरिक्त तर्कों के साथ दोबारा कोर्ट का रुख कर सकता है।
संभल को लेकर हाई कोर्ट की यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल नवंबर में यहां हिंसा भड़क गई थी। इसके बाद से ही इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और प्रशासन भी पूरी तरह से सतर्क है।
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