प्रियंका गांधी ने कहा, "जब मेरे भाई ने संसद में जाति गणना की मांग उठाई थी, तब पूरी भाजपा उसके खिलाफ थी। उनके वक्तव्य पर मजाक उड़ाया गया। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। देशभर में जागरूकता आई है और लोग समझ रहे हैं कि जाति आधारित आंकड़े आवश्यक हैं। दबाव इतना बढ़ा कि अब सरकार को झुकना पड़ा।" उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि सरकार अब इस प्रक्रिया को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ पूरा करेगी ताकि वास्तविक और सटीक आंकड़े सामने आ सकें।
इससे पहले, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार के फैसले पर तीखी टिप्पणी की और इसे "अचानक और हताश यू-टर्न" करार दिया। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि अप्रैल 2024 में एक टेलीविज़न साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मोदी ने जाति गणना की मांग करने वालों को "शहरी नक्सली" तक कह दिया था।
हालांकि, बीते सप्ताह प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स की बैठक में जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को शामिल करने का निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्र के समग्र हितों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कांग्रेस पार्टी ने इस बीच एक प्रस्ताव पारित करते हुए संविधान के अनुच्छेद 15(5) को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की है। इस खंड के तहत सरकार को निजी शिक्षण संस्थानों में भी ओबीसी, दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षण लागू करने की अनुमति मिलती है। पार्टी का कहना है कि अद्यतन जातिगत आंकड़े आरक्षण नीतियों को और सशक्त बनाने में मदद करेंगे।





