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जातीय जनगणना पर बृजभूषण का बयान, "सवर्णों के लिए अलग देश बनेगा, फूटेगा बम"

बिहार के औरंगाबाद में मीडिया से बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया कि जातीय जनगणना के बाद देश में बम फूटेगा और सवर्ण आसमान में उड़ जाएंगे।

जातीय जनगणना पर बृजभूषण का बयान, "सवर्णों के लिए अलग देश बनेगा, फूटेगा बम"
फोटो: जातीय जनगणना पर बृजभूषण का बयान, "सवर्णों के लिए अलग देश बनेगा, फूटेगा बम"
भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने जातीय जनगणना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिहार के औरंगाबाद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि जातीय जनगणना के बाद देश में बम फूटेगा और सवर्ण आसमान में उड़ जाएंगे। बृजभूषण ने कहा, “पूरा देश जातीय जनगणना चाहता है। इसकी शुरुआत बिहार और उत्तर प्रदेश से हुई थी, लेकिन अब कुछ लोग इस पर हाय-तौबा मचा रहे हैं। अगर जातीय जनगणना हुई, तो ऐसा विस्फोट होगा कि सवर्ण देश से बाहर हो जाएंगे। हमारे लिए अलग देश बनेगा और हम आसमान में चले जाएंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सिर्फ राजपूतों का नेता कहना अपमानजनक लगता है। मैं सर्व समाज की बात करता हूं और सर्व समाज का नेता हूं । बृजभूषण सिंह ने महिला उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और एससी/एसटी एक्ट जैसे कानूनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन तीनों कानूनों से देश परेशान है और इनका दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना था, “ये कानून समाज के कमजोर वर्गों की रक्षा के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए हो रहा है। अगर इन्हें हटाया नहीं गया तो कम से कम इनके दुरुपयोग पर सख्त नियंत्रण होना चाहिए।”

अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर खारिज किया। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ जो आरोप लगे हैं वे पूरी तरह से झूठे और राजनीति से प्रेरित हैं। कानूनों का इस तरह इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।” बृजभूषण सिंह ने हालिया सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की भी सराहना की और इसे “देश के लिए गर्व की बात” बताया। उन्होंने युद्धविराम के बाद उठे राजनीतिक सवालों को लेकर विपक्ष पर हमला बोला।

उन्होंने कहा, “जब 1971 में भारत ने 62 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया था, तो उस समय पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को वापस लेने की शर्त क्यों नहीं रखी गई? उस वक्त यह शर्त रखी जा सकती थी कि ‘PoK दो, तभी सैनिक मिलेंगे।’ लेकिन तब ऐसा नहीं किया गया, अब युद्ध की राजनीति क्यों?”