इस बयान में विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर, ताइवान और जापान के साथ सीमा विवाद जैसे मामलों पर सख्त रुख अपनाने का संदेश दिया गया। चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान और भारत जैसे देशों के बीच गहरी चिंता बनी हुई है, जो इन विवादों के संभावित प्रभावों से बचने की कोशिश कर रहे हैं। चीन की बढ़ती आक्रामकता और क्षेत्रीय विवादों में उसकी भूमिका पर चिंता जताई गई है।
चीन के विदेश मंत्री इवाया टाकेशी ने इस बयान पर प्रतिकिया देते हुए साउथ चाइना सी के बारे में कहा कि चीन का इस क्षेत्र में दावा पूरी तरह से सही और तार्किक है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई गलत नहीं है, और चीन ने इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा माना है। उन्होंने यह भी कहा कि क्वाड देशों द्वारा चीन का जिक्र करना गलत था और यह चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने जैसा है। यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी चीन ने क्वाड के देशों की गतिविधियों पर आपत्ति जताई है, और यह बयान इस संबंध में उसकी लगातार रुख को दर्शाता है।
भारत के लिए यह मीटिंग महत्वपूर्ण थी क्योंकि एक तरफ विदेश मंत्री एस. जयशंकर शपथ समारोह में पहले कतार में दिखाई दिए और दूसरी ओर क्वाड देशों की मीटिंग में चीन के खिलाफ संयुक्त रूप से बयान जारी किया गया। इससे भारत का अंतरराष्ट्रीय मंच पर कद और बढ़ता हुआ नजर आया। साथ ही, यह दिखाता है कि भारत का वैश्विक प्रभाव और इसकी भूमिका क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में मजबूत हो रही है। चीन के खिलाफ इस तरह की गोलबंदी से भारत का रणनीतिक महत्व भी बढ़ रहा है।
अमेरिका की ओर से यह संदेश दिया गया है कि वह चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए भारत और जापान जैसे देशों को साथ लेकर चलेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही पनामा नहर, टिकटॉक, और टैक्स जैसे मुद्दों पर चीन को चेतावनी दी थी, और यह संकेत दिया गया है कि अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध में और भी तेज़ी आ सकती है। दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति पहले ही बनी हुई थी, और ट्रंप की वापसी से इसमें और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि क्वाड देशों की बैठक का समय ही इसकी अहमियत को उजागर करता है, और यह दर्शाता है कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए क्वाड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस बीच, चीन की ओर से भी क्वाड देशों के बयान पर प्रतिक्रिया आई। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने अपने बयान में कहा कि साउथ चाइना सी को लेकर चीन का दावा पूरी तरह से न्यायसंगत है और यह क्षेत्र चीन के लिए एक रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा है। माओ निंग ने साथ ही यह भी कहा कि क्वाड देशों द्वारा इस मुद्दे पर बयान देना चीन के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप है, और उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। चीन का मानना है कि इन देशों के बीच किसी प्रकार की संधि या गठबंधन सिर्फ उसे घेरने के लिए नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक और राजनीतिक शक्ति को बढ़ाने के लिए है, जो कि चीन के लिए एक सीधा खतरा हो सकता है।
चीन को पहले भी क्वाड देशों की गतिविधियों पर आपत्ति रही है, और यह बयान भी उसी सिलसिले की कड़ी है। क्वाड देशों की बैठक ने चीन के सामने यह स्पष्ट कर दिया है कि इन देशों के बीच सहयोग और साझेदारी दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और शांति की स्थिति को बनाए रखने के लिए और मजबूत होगी। चीन द्वारा अपने क्षेत्रीय दावों को सही ठहराने का प्रयास इसके कूटनीतिक रिश्तों को और जटिल बना सकता है, और आने वाले समय में इसके परिणामों का सामना उसे करना पड़ सकता है।
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