सुप्रीम कोर्ट में माफी की पेशकश
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 10 अक्टूबर को आयोजित प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी। इस मामले में पेश किए गए शपथ पत्र की शुरुआत माफी से की गई, जिसके बाद मीडिया में यह जानकारी फैल गई कि केंद्रीय गृह सचिव ने बिना शर्त माफी मांगी है। इस पर गृह मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की।
गृह मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना नोटिस जारी किया जाता है, तो जवाब देने वाले पक्ष को अपने हलफनामे की शुरुआत बिना शर्त माफी से करनी होती है। इसके बाद ही अन्य तथ्य और दलीलें प्रस्तुत की जाती हैं।
मंत्रालय ने बताया प्रक्रिया का पालन
गृह मंत्रालय ने पोस्ट में स्पष्ट किया कि 'अवमानना से जुड़ी हर याचिका में इस प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।' मंत्रालय ने आगे बताया कि यह निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप था कि केंद्रीय गृह सचिव और अन्य अधिकारियों ने शपथ पत्र दाखिल करते समय पहले पैराग्राफ में माफी मांगकर अपनी बात शुरू की।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि उन्होंने अदालत के सामने यह स्पष्ट किया कि सरकार और पुलिस की सभी कार्रवाइयां कानून के अनुसार थीं, इसलिए उनके खिलाफ अवमानना का कोई मामला नहीं बनता है।
पुलिस के कदमों का बचाव
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने भी सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन साथ ही पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि समय पर उठाए गए उचित कदमों के कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ने की बड़ी स्थिति टल गई।
अनुराग कुमार ने कहा कि खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्थिति का आकलन करते हुए 10 अक्टूबर को एहतियाती कदम उठाए गए थे। उन्होंने बताया कि चूंकि दिल्ली देश की राजधानी है, इसलिए उठाए गए कदमों को इसी दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
प्रदर्शन से पहले की स्थिति
10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसके चलते पुलिस ने बिना अनुमति के आयोजित किए जा रहे प्रदर्शन को रोकने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाईं, जिसमें दर्जनों ट्रेनों का रद्द होना और 57 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करना शामिल था।
इस पाबंदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि आम लोगों को असुविधा न हो। इसके फलस्वरूप बंद गेट वाले मेट्रो स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 की गई और नई दिल्ली में चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं भी बंद रहीं।





