प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर उन्हें तितर-बितर करने की कोशिश की। स्थिति और बिगड़ने पर पुलिस ने वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया और कुछ स्थानों पर खाली गोलियां चलाईं। तिनकुने क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, जहां हजारों लोग "राजा आओ, देश बचाओ", "भ्रष्ट सरकार नीचे जाओ" और "हमें राजतंत्र वापस चाहिए" जैसे नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों में कई लोग नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की तस्वीरें लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसके साथ ही कुछ प्रदर्शनकारी पत्थरबाजी भी कर रहे थे, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
झड़प के दौरान एक व्यक्ति घायल हो गया और पुलिस ने कई युवाओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शनों के बढ़ते हिंसक रूप के कारण काठमांडू में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, और सैकड़ों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
सुरक्षा बलों के बीच और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की आशंका जताई जा रही है। यह प्रदर्शन नवराज सुबेदी द्वारा नेतृत्व वाली संयुक्त आंदोलन समिति ने आयोजित किया था, जिसमें विवादास्पद व्यवसायी दुर्गा प्रसाई ने भी अपने समर्थकों को जुटाया। इसके अलावा, राजेंद्र लिंगदेन के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया, जिससे यह मामला और गरमा गया।
इस प्रदर्शन ने नेपाल के राजनीतिक वातावरण को और ज्यादा गर्म कर दिया है, क्योंकि यह मुद्दा केवल राजशाही के समर्थन से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह हिंदू राज्य की बहाली से संबंधित भी है, जो नेपाल की मौजूदा राजनीति में एक बड़ा विवादित मुद्दा बन गया है।
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