यह घटनाक्रम तब हुआ जब बदरपुर के 'आप' विधायक ने विधानसभा में पानी की समस्या से जुड़ा सवाल पूछा था, और मंत्री ने उसका जवाब देते हुए कहा, "आप के कई विधायक मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिले और मुझसे कहा कि इस बार के चुनाव में एक अच्छी बात यह हुई कि अरविंद केजरीवाल हार गए।" प्रवेश वर्मा ने यह भी कहा कि इन विधायकों के लिए यह खुशी की बात थी क्योंकि उनके मुख्यमंत्री ने उनकी बुनियादी समस्याओं, जैसे पानी और सीवर व्यवस्था, का समाधान नहीं किया था। मंत्री ने यह टिप्पणी करते हुए यह भी जोड़ा कि ये विधायक अपने मुख्यमंत्री की नाकामी पर खेद महसूस कर रहे थे, लेकिन उनकी हार को एक राहत के रूप में देख रहे थे।
वर्मा के बयान के बाद 'आप' के सदस्य खासकर आतिशी और संजीव झा ने हंगामा शुरू कर दिया और वर्मा से यह पूछने लगे कि वह उन विधायकों के नाम क्यों नहीं बता रहे। संजीव झा ने कहा, "विधानसभा में बिना साक्ष्य के इस तरह की हवा-हवाई बातें नहीं चल सकतीं। मंत्री को उन विधायकों का नाम बताना होगा जिन्होंने यह टिप्पणी की थी।" विधायक संजीव झा ने बार-बार मंत्री से उन विधायकों के नाम जानने की मांग की। यह मुद्दा इस हद तक बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंक-झोंक शुरू हो गई, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित हो गई।
हालांकि, मंत्री ने इस पर चुप्पी साधते हुए यह भी कहा कि जिन विधायकों ने यह बात कही थी, उन्होंने उन्हें यह कसम दी थी कि वह उनका नाम सार्वजनिक न करें। इस बवाल के बावजूद, विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू होने के बाद भी इस मुद्दे पर चर्चा जारी रही। 'आप' के विधायक इस बात पर अडिग थे कि अगर मंत्री इस मुद्दे पर बयान दे रहे हैं, तो उन्हें उन विधायकों के नाम सार्वजनिक करना चाहिए।
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