विवाद की शुरुआत: कॉलर पकड़ने से भड़का मामला
हंगामे की शुरुआत उस वक्त हुई जब कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बहिनीपति, शहरी विकास मंत्री के.सी. महापात्र के सामने खड़े होकर किसी मुद्दे पर अपनी बात रख रहे थे। मंत्री सदन में एक सवाल का जवाब दे रहे थे, तभी भाजपा के वरिष्ठ विधायक जय नारायण मिश्रा, कांग्रेस विधायक बहिनीपति की ओर बढ़े और कथित तौर पर उनका कॉलर पकड़ लिया। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस होने लगी और देखते ही देखते मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।
विधानसभा से बाहर निकलने के बाद कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बहिनीपति ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं मंत्री के.सी. महापात्र से हाथ जोड़कर निवेदन कर रहा था कि जब सदन में व्यवस्था नहीं है तो वह अपना जवाब न दें। इसी दौरान भाजपा विधायक जय नारायण मिश्रा अचानक मेरे पास आए और मेरा कॉलर पकड़ लिया और मुझे धक्का देने लगे।"
कांग्रेस विधायक का आरोप सुनते ही कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भाजपा विधायक जय नारायण मिश्रा के खिलाफ विरोध जताना शुरू कर दिया। इसके बाद देखते ही देखते दोनों दलों के विधायकों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति तनावपूर्ण होने के कारण विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी को सदन की कार्यवाही को अपराह्न तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
इस दौरान सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के विधायक एक-दूसरे को धक्का देते हुए सदन में हंगामा करते दिखे। वहीं, विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) के विधायक इस पूरे घटनाक्रम से दूरी बनाए रखते नजर आए।
बीजद ने मुख्यमंत्री के बयान की मांग को लेकर किया प्रदर्शन
इस बीच बीजू जनता दल (बीजद) के विधायकों ने भाजपा विधायक जय नारायण मिश्रा द्वारा 1936 में तत्कालीन कोसल के ओडिशा में विलय को 'ऐतिहासिक गलती' बताने वाली टिप्पणी पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से स्पष्टीकरण देने की मांग की। बीजद विधायकों ने मुख्यमंत्री के लगातार दो दिनों से सदन में अनुपस्थिति को लेकर विरोध जताया और विधानसभा परिसर में लालटेन जलाकर सांकेतिक प्रदर्शन किया।
बीजद विधायकों का कहना था कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति से यह साफ है कि सरकार जनहित के मुद्दों से बचना चाहती है। उन्होंने मुख्यमंत्री के कक्ष के बाहर धरना भी दिया और मांग की कि मुख्यमंत्री माझी इस मुद्दे पर सदन के भीतर आकर स्थिति स्पष्ट करें।
दूसरी ओर, कांग्रेस के विधायक राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे। उनका कहना था कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह विफल रही है और अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। विधानसभा में बढ़ते हंगामे और दोनों दलों के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक पर विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, "सदन की गरिमा बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस तरह से एक-दूसरे पर टिप्पणी करना, हाथापाई करना और धक्का-मुक्की करना अनुचित है। यदि इस तरह की घटनाएं दोबारा हुईं तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।"
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