महाराष्ट्र की महायुति सरकार द्वारा लागू की गई इस नीति के तहत राज्य के स्कूलों में पहली से पाँचवीं कक्षा तक हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। मराठी और अंग्रेजी के अलावा अब छात्रों को हिंदी भी सीखनी होगी। सरकार का तर्क है कि हिंदी एक संपर्क भाषा बन चुकी है और भविष्य में छात्रों के लिए यह भाषा लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इस नीति के खिलाफ कांग्रेस, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना, मनसे और अन्य विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। इन दलों का कहना है कि यह निर्णय महाराष्ट्र पर हिंदी थोपने की कोशिश है, जो राज्य की सांस्कृतिक विविधता और भाषाई पहचान के खिलाफ है। उनका आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है और इससे मराठी भाषा व संस्कृति हाशिये पर चली जाएगी।
मनसे ने क्या लिखा है पत्र में?
मनसे नेता संदीप देशपांडे द्वारा मोहन भागवत को लिखे गए पत्र में इस फैसले को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। उन्होंने लिखा, "हिंदी भाषा को राज्यों पर थोपने से न केवल भाषाई टकराव बढ़ेगा, बल्कि हिंदू समाज में भी विभाजन की स्थिति पैदा होगी। यह राष्ट्रहित में नहीं है।"
देशपांडे ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए लिखा कि "मराठों ने देश के विभिन्न हिस्सों में दो सदियों तक शासन किया—ग्वालियर में शिंदे, इंदौर में होलकर और बड़ौदा में गायकवाड़—but they never imposed Marathi on anyone. यह सहिष्णुता मराठा संस्कृति की पहचान रही है।"
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि "यदि केंद्र या राज्य सरकारें हिंदी को अन्य राज्यों पर जबरन थोपने की कोशिश करेंगी, तो क्षेत्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष और तेज होगा।"
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, "महाराष्ट्र में मराठी भाषा का ज्ञान हर नागरिक को होना ही चाहिए।" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि, "हिंदी अब एक सुविधाजनक और संपर्क की भाषा बन चुकी है, जिसे सीखना छात्रों के लिए लाभदायक हो सकता है।"
यह संतुलित बयान भी राजनीतिक माहौल को ठंडा करने में असफल रहा है, क्योंकि विपक्ष इसे ‘मराठी बनाम गैर-मराठी’ के विवाद के रूप में पेश कर रहा है। मुंबई और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लंबे समय से मराठी बनाम गैर-मराठी बहस चलती रही है। मनसे और शिवसेना जैसे दलों ने हमेशा मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा को अपने राजनीतिक एजेंडे में प्राथमिकता दी है। ऐसे में थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को मराठी अस्मिता पर हमले के तौर पर देखा जा रहा है।





