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“हनुमान चालीसा सुनाओ, तब ही सामान बेचो”- महाराष्ट्र मंत्री नितेश राणे का बयान

रत्नागिरी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए नितेश राणे ने कहा, “उन्होंने (आतंकियों ने) हमें गोली मारने से पहले हमारा धर्म पूछा। इसलिए हिंदुओं को भी किसी |

“हनुमान चालीसा सुनाओ, तब ही सामान बेचो”- महाराष्ट्र मंत्री नितेश राणे का बयान
फोटो: “हनुमान चालीसा सुनाओ, तब ही सामान बेचो”- महाराष्ट्र मंत्री नितेश राणे का बयान
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया है। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई और कई घायल हुए। इसी माहौल के बीच महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने एक विवादास्पद बयान देकर नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। उन्होंने हिंदुओं से अपील की है कि वे किसी भी दुकानदार से खरीदारी करने से पहले उसका धर्म पूछें।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रत्नागिरी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए नितेश राणे ने कहा, “उन्होंने (आतंकियों ने) हमें गोली मारने से पहले हमारा धर्म पूछा। इसलिए हिंदुओं को भी किसी से कुछ खरीदने से पहले उसका धर्म पूछना चाहिए। अगर दुकानदार कहता है कि वह हिंदू है, तो उसे हनुमान चालीसा सुनाने के लिए कहिए। अगर वह नहीं सुना सकता, तो उससे कुछ न खरीदें।” राणे ने यह भी कहा कि कुछ लोग अपना धर्म छिपा सकते हैं या झूठ बोल सकते हैं, इसलिए उनकी असल पहचान जानने के लिए ‘हनुमान चालीसा टेस्ट’ का सहारा लिया जाए।


अपने भाषण में राणे ने मुगल बादशाह औरंगजेब का उल्लेख करते हुए कहा, “औरंगजेब ने अपने पिता और भाई को नहीं बख्शा। जब वह अपनों का सम्मान नहीं कर सका, तो वह दूसरों का कैसे करेगा?” उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि “जब भी आप बाजार जाएं, संकल्प लें कि केवल हिंदू दुकानदार से ही सामान खरीदेंगे। अगर वे धर्म के आधार पर हमसे भेदभाव कर सकते हैं, तो हमें भी इस पर विचार करना होगा।”

22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम स्थित प्रसिद्ध टूरिस्ट डेस्टिनेशन बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। चश्मदीदों के अनुसार, भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने टूरिस्टों को गोली मारने से पहले उनके नाम और धर्म पूछे। बचे हुए लोगों ने बताया कि हमलावरों ने कुछ पर्यटकों से 'कलमा' पढ़ने को कहा। जो पर्यटक ऐसा नहीं कर पाए, उन्हें गोली मार दी गई। नितेश राणे के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। जहां कुछ संगठनों ने उनके बयान का समर्थन किया है, वहीं कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बयान को समाज में धार्मिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला बताया है।