राज्य सरकार ने अदालत से येदियुरप्पा द्वारा दायर याचिका को खारिज करने की अपील की है। यह याचिका पिछले वर्ष फरवरी में एक 17 वर्षीय नाबालिग के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग करती है। रवि वर्मा कुमार ने कोर्ट को बताया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत इस प्रकार के मामलों में दोष सिद्धि की एक वैधानिक धारणा होती है और इसलिए आरोपी की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत खारिज करने की याचिका विचारणीय नहीं है।'
रविश वर्मा कुमार ने अदालत में पीड़िता का बयान और उसकी मां द्वारा बनाए गए एक महत्वपूर्ण वॉयस रिकॉर्डिंग को भी प्रस्तुत किया है, जिसमें पीड़िता की मां और येदियुरप्पा के बीच बातचीत है। यह बातचीत उस समय हुई थी जब पीड़िता ने अपनी मां को पूरी घटना के बारे में बताया था। शिकायत के मुताबिक, पीड़िता की मां ने 14 मार्च 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वरिष्ठ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने उसकी 17 वर्षीय बेटी का यौन उत्पीड़न किया था। शिकायत के अनुसार, घटना उस वक्त हुई जब महिला अपनी बेटी के साथ येदियुरप्पा से मिलने उनके आवास पर गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर पोक्सो अधिनियम की धारा 8 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (ए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की।
वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि आरोपी की ओर से दोष की यह धारणा केवल कानून की जरूरत के मुताबिक नहीं है, बल्कि इस मामले में तो पीड़िता के फोन से प्राप्त महत्वपूर्ण वॉयस रिकॉर्डिंग भी आरोपी की संलिप्तता को स्पष्ट करती है। उक्त रिकॉर्डिंग में येदियुरप्पा पीड़िता की मां से पूछते हुए सुनाई दे रहे हैं कि उन्होंने उसकी नाबालिग बेटी का यौन शोषण क्यों किया। इस बातचीत में, पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पीड़िता उनकी अपनी पोती की तरह है और वह केवल उसे जांच रहे थे।
यह केस ना केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के प्रति संवेदनशीलता और तत्काल न्याय की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। कोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट है कि पीड़िता का बयान और उसके सबूत अदालत के सामने सही दिशा में संकेत कर रहे हैं, जिससे येदियुरप्पा के खिलाफ आरोपों की गंभीरता बढ़ जाती है।
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