संघ के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने 1 जनवरी, 2023 को NPS को खत्म करने का मुद्दा अपने कैबिनेट में उठाने का वादा किया था। लेकिन इस बीच, सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का ऐलान किया, जिसे कर्मचारी संघ ने ठुकरा दिया है। उनकी मांग है कि सिर्फ पुरानी पेंशन स्कीम ही लागू की जाए।
घोषणापत्र के अनुसार कोई आश्वासन नहीं
कर्नाटक राज्य सरकार एनपीएस कर्मचारी संघ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अगर 2025-2026 के बजट में कांग्रेस के घोषणापत्र के अनुसार कोई आश्वासन नहीं दिया गया, तो हम अपने अधिकारों की मांग को लेकर धरना देंगे। कर्मचारी संघ सरकार की उस समिति का भी विरोध कर रहा है, जिसे उन राज्यों का अध्ययन करने के लिए गठित किया गया है जहां NPS को खत्म कर, OPS की वापसी हुई है। इस संबंध में सरकार ने एक नोटिफिकेशन भी जारी किया था। यह विरोध पहली बार नहीं हुआ है। पिछले साल भी कर्मचारियों ने इसी तरह विरोध प्रदर्शन किया था। तब मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि जब कांग्रेस की सरकार सत्ता में आएगी, तो उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा।
कर्नाटक में 1 अप्रैल 2006 के बाद सरकारी नौकरी में शामिल हुए कर्मचारियों की संख्या करीब 2 लाख 78 हजार है, जो कि NPS स्कीम के तहत आते हैं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने भी वादा किया था कि वह NPS को वापस लेने और OPS को फिर से लागू करने पर विचार करेगी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने घोषणापत्र में ओल्ड पेंशन स्कीम का जिक्र नहीं किया था। हालांकि, जब इस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह घोषणापत्र से गायब नहीं है। सरकार ने NPS के प्रावधानों का अध्ययन करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है, इस वजह से इसे मेनिफेस्टो में शामिल नहीं किया गया।
बीते कुछ वर्षों में हरियाणा समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, जहां कांग्रेस ने OPS को लेकर वादा किया था, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा। वहीं, तेलंगाना में उसने इस पर कुछ भी नहीं कहा, लेकिन वहां उसे जीत मिली। हिमाचल प्रदेश समेत चार राज्यों ने तो पहले ही OPS को लागू कर दिया है।
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