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ISRO ने PSLV-C60 के साथ SpaDeX मिशन में नया मुकाम हासिल किया

श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार रात 10 बजे 44.5 मीटर लंबा ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV-C60) रॉकेट दो छोटे अंतरिक्षयानों |

ISRO ने PSLV-C60 के साथ SpaDeX  मिशन में नया मुकाम हासिल किया
फोटो: ISRO, SpaDeX, PSLV-C60
भारत ने एक बार फिर से अंतरिक्ष में अपनी ताकत का परिचय दिया है, और इस बार स्पैडेक्स मिशन के साथ। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार रात 10 बजे 44.5 मीटर लंबा ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV-C60) रॉकेट दो छोटे अंतरिक्षयानों—चेजर और टारगेट—के साथ सफलता से उड़ान भरने में सफल रहा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पुष्टि की कि दोनों अंतरिक्षयान सफलतापूर्वक अलग हो गए और उन्हें कक्षा में स्थापित किया गया।

मिशन की सफलता और डॉकिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम


मिशन निदेशक एम. जयकुमार ने इसे एक सफल प्रयास बताया। ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा, "रॉकेट ने 15 मिनट की उड़ान के बाद दोनों अंतरिक्षयानों को 475 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया।" डॉकिंग प्रक्रिया के लिए अगले सप्ताह, संभवत: 7 जनवरी को, तारीख निर्धारित की गई है। यह मिशन भारत को डॉकिंग और अनडॉकिंग की क्षमता प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बना देगा। इस समय दुनिया में सिर्फ तीन देश—अमेरिका, रूस और चीन—इस तकनीक में सक्षम हैं।

स्पैडेक्स मिशन का महत्व


इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में दो अंतरिक्ष यानों के एक-दूसरे से जुड़ने की प्रक्रिया को डॉकिंग कहा जाता है, और उनके अलग होने को अनडॉकिंग कहा जाता है। डॉकिंग और अनडॉकिंग की यह क्षमता भविष्य में मानव अंतरिक्ष उड़ानों, चांद से नमूने लाने और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BSS) की स्थापना के लिए आवश्यक तकनीक साबित होगी। इसरो ने पहले ही इस साल अपने मिशन एक्सपोसेट और सूर्य मिशन 'आदित्य' में सफलता हासिल की थी, और अब इस मिशन के साथ वर्ष का समापन किया गया है, जो भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।

स्पैडेक्स मिशन का उद्देश्य मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए जरूरी तकनीकों का प्रदर्शन करना है, विशेष रूप से डॉकिंग तकनीक। यह मिशन चंद्रमा पर मानव मिशन, चांद से नमूने लाने और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। इस तकनीक की आवश्यकता भविष्य में किसी भी अंतरिक्ष मिशन में एक से अधिक रॉकेटों को लॉन्च करने के लिए भी होगी।