दरअसल, विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब इमरान मसूद ने सपा के 80-17 सीटों के फार्मूले को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने एक पार्टी कार्यक्रम में कहा, "कांग्रेस को किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है। अब यह नहीं चलेगा कि सपा तय करे कि हम कौन सी सीट पर लड़ें। समझौता होगा तो बराबरी का होगा। सीटों का फैसला कांग्रेस नेतृत्व करेगा।"
इमरान मसूद के इस बयान ने गठबंधन में दरार की आहट को स्पष्ट कर दिया। जवाब में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने मसूद पर निशाना साधते हुए कहा,
"मुझे नहीं पता कि कांग्रेस ने इमरान मसूद को गठबंधन पर फैसला लेने की इतनी शक्ति कब दे दी। ऐसे निर्णय मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी या सोनिया गांधी जैसे वरिष्ठ नेता ही ले सकते हैं।"
इस सियासी रस्साकशी के बीच इमरान मसूद ने राहुल गांधी के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की है, जिसे कई राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने तस्वीर के साथ लिखा, "हम जमीनी स्तर से कांग्रेस को मजबूती देंगे— गांवों से लेकर बूथ तक, हर दिल तक पहुंचेंगे।"
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तस्वीर मसूद की पार्टी में स्थिति को मजबूत दिखाने की एक कोशिश है, साथ ही सपा को एक 'राजनीतिक संदेश' भी।





