रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि इस विधेयक में मुसलमानों के धार्मिक मामलों में किसी भी प्रकार का दखल देने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय वक्फ काउंसिल में कुल 22 सदस्य होंगे, जिनमें 10 मुसलमान होंगे और अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल होंगी।
इमरान मसूद ने इस प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गैर-मुस्लिमों को वक्फ काउंसिल में शामिल करना एक गलत कदम है और यह मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्ति से गरीबों और यतीमों की मदद होती है, और इसे इस प्रकार से राजनीति में इस्तेमाल करना मुस्लिम समाज के खिलाफ एक साजिश है। मसूद ने आगे कहा कि अगर सरकार का यही रवैया रहा तो मुसलमान इसे कभी माफ नहीं करेगा, क्योंकि यह उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा।
इसके साथ ही, इमरान मसूद ने यह भी कहा कि वह खुद को रामजी का वंशज मानते हैं और अगर सरकार को किसी धार्मिक ट्रस्ट में गैर-मुस्लिम सदस्य चाहिए, तो उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह दावा करते हुए कहा कि वह अपने वंशज होने को साबित कर सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा, "मैं रामजी का वंशज हूं, मुझे राम मंदिर ट्रस्ट में जगह दिलवाइए। अगर आप मुझे नहीं मानते, तो मैं इसे साबित कर सकता हूं।"
इमरान मसूद ने यह भी चेतावनी दी कि यह मुद्दा मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इस पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अन्य राजनीतिक नेताओं जैसे चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार, चिराग पासवान और जयंत चौधरी से भी अपील की कि अगर वे मुसलमानों का समर्थन चाहते हैं तो उन्हें इस संवेदनशील मसले पर मुसलमानों के साथ खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा, "यदि आपको मुसलमानों का वोट चाहिए तो इस मुद्दे पर हमारे साथ खड़े हो जाइए, अन्यथा मुसलमान इस बात को कभी माफ नहीं करेंगे।"
यह बयान और चर्चा अब राजनीतिक गलियारों में एक नया मोड़ लेकर आई है, जहां यह मसला मुसलमानों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है, और कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस पर सख्त रुख अपना रहे हैं।
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