थरूर ने प्रधानमंत्री से अपनी मुलाकात के बारे में कहा,
“प्रधानमंत्री के साथ चर्चा केवल सांसदों के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से जुड़े विषयों तक सीमित थी। जब देशहित का मामला हो, तो हम सबकी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम एकजुट होकर खड़े हों। देश को जब भी मेरी जरूरत होगी, मैं सेवा के लिए हमेशा तैयार हूं।”
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में वैश्विक समुदाय को भारत का पक्ष स्पष्ट करने के लिए सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों का गठन किया था। इनमें से एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस नेता शशि थरूर को सौंपा गया था। थरूर ने अमेरिका और कोलंबिया जैसे देशों का दौरा किया, जहां उनके तर्कों और कूटनीतिक प्रयासों के चलते कोलंबिया ने पाकिस्तान के समर्थन में दिया गया अपना बयान वापस ले लिया था। इसे थरूर की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया।
थरूर को प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाने पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने डेलिगेशन के लिए जिन नामों की सिफारिश की थी, उनमें शशि थरूर का नाम नहीं था। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने न केवल उन्हें डेलिगेशन में जगह दी, बल्कि उन्हें एक टीम का नेतृत्व भी सौंपा। विदेश यात्रा से लौटने के बाद थरूर और अन्य प्रतिनिधियों ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी और अपने अनुभव साझा किए थे।





