बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद भी शामिल हुए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह कवायद 'संगठन सृजन अभियान' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ज़मीनी स्तर पर कांग्रेस को अधिक मजबूत और जनकेंद्रित बनाना है। इस अभियान की शुरुआत 15 अप्रैल को गुजरात के मोडासा से हुई थी और हरियाणा इसे अपनाने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक जिले से छह उपयुक्त नाम प्राथमिकता क्रम में प्रस्तावित करें। ये नाम स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ चर्चा के आधार पर चुने जाएंगे। सभी पर्यवेक्षकों को 30 जून तक अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपनी होगी।
यह निर्णय 9 अप्रैल को अहमदाबाद में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान लिया गया था, जिसमें संगठनात्मक नियुक्तियों को अधिक पारदर्शी और सहभागी बनाने की रणनीति तय की गई थी। कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दिया है कि यह मॉडल अब मध्य प्रदेश में भी लागू किया जा रहा है और जल्द ही इसे देशभर में फैलाया जाएगा। पार्टी का दीर्घकालिक उद्देश्य स्थानीय संगठनों को मज़बूत करना है ताकि कार्यकर्ताओं, नेताओं और आम जनता के बीच संवाद और सहयोग की प्रक्रिया को संस्थागत रूप दिया जा सके।





