मुख्यमंत्री नायब सैनी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने खुद उनके घर जाकर उन्हें भाजपा में शामिल किया। इसके बाद, जो नेता कल तक कांग्रेस का प्रचार कर रहे थे, अब वे भाजपा के लिए मैदान में उतर गए हैं।
कांग्रेस खेमे में मायूसी और हताशा
कांग्रेस के अंदर हालात बेहद निराशाजनक नजर आ रहे हैं। मेयर और वार्ड प्रत्याशियों के चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही है। अचानक बदले राजनीतिक समीकरणों ने उन्हें भी चौंका दिया है। जो नेता कल तक उनके नामांकन कार्यक्रम में उनके साथ थे, वे सुबह होते ही बगावत पर उतर आए, यह बात खुद प्रत्याशियों के लिए भी हैरान करने वाली है।
टिकट मिलने के बाद लापता हुआ प्रत्याशी
गौरतलब है कि कांग्रेस ने रविवार शाम को करनाल नगर निगम के 20 वार्डों में से 12 वार्डों के पार्षद उम्मीदवारों की घोषणा की थी।
सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन चार नए प्रत्याशी उतारे गए और चार अन्य को समर्थन देने का ऐलान किया गया था। लेकिन, वार्ड-8 के प्रत्याशी टिकट मिलने के बाद लापता हो गए, जबकि वार्ड-20 के प्रत्याशी ने चुनाव से ही किनारा कर लिया, जिससे पार्टी को पहला झटका मिला।
कांग्रेस मुक्त करनाल का दावा
अब कांग्रेस के प्रमुख चेहरे तरलोचन सिंह और अशोक खुराना के पार्टी छोड़ने के बाद निकाय चुनाव की तस्वीर पूरी तरह बदलती दिख रही है।
इस बीच, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "आज करनाल कांग्रेस मुक्त हुआ है, जल्द ही पूरा प्रदेश भी कांग्रेस मुक्त हो जाएगा।" इस घटनाक्रम से कांग्रेस को जहां बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं भाजपा के लिए यह एक मजबूत राजनीतिक बढ़त साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि निकाय चुनाव में इस सियासी उलटफेर का क्या असर पड़ता है और क्या भाजपा इस मौके को भुनाने में सफल हो पाती है या नहीं।
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