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Farmer Protest: बातचीत के लिए केंद्र सरकार के संकेत पर किसानों ने रोका अपना 25 फरवरी को दिल्ली कूच का प्लान

केंद्र सरकार द्वारा बातचीत के लिए न्योता मिलने के बाद किसान मजदूर मोर्चा KMM अपनी आगामी योजना में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। पहले किसान संगठन ने 25 |

Farmer Protest: बातचीत के लिए केंद्र सरकार के संकेत पर किसानों ने रोका अपना 25 फरवरी को दिल्ली कूच का प्लान
फोटो: Farmer Protest, Central Government,
केंद्र सरकार द्वारा बातचीत के लिए न्योता मिलने के बाद किसान मजदूर मोर्चा (KMM) अपनी आगामी योजना में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। पहले, किसान संगठन ने 25 फरवरी को दिल्ली कूच करने का ऐलान किया था, लेकिन इस बीच केंद्र सरकार ने 19 मार्च को तीसरे चरण की बातचीत के लिए किसान नेताओं को आमंत्रित किया है। किसान नेताओं के अनुसार, सरकार बातचीत को जारी रखने के इच्छुक हैं और इस संकेत के बाद, किसानों ने अपनी योजना में कुछ बदलाव करने का निर्णय लिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन जारी रहेगा, और 19 मार्च तक अन्य स्थानों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। 

 शनिवार को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चंडीगढ़ में किसानों से बैठक की थी, जिसमें किसानों की प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई। किसानों की मुख्य मांग है कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानूनी गारंटी दी जाए ताकि उनके उत्पादों की कीमतें सुनिश्चित की जा सकें। इसके अलावा, किसानों ने अन्य कई मुद्दों पर भी अपनी राय रखी, जिनमें सरकार से उनकी सुरक्षा और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी की मांग भी शामिल है। अब, इस मुद्दे पर आगामी बातचीत 19 मार्च को होनी है, जब केंद्र सरकार और किसान संगठन के बीच एक और महत्वपूर्ण दौर होगा। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के एक पदाधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने उन्हें अगले चरण की बातचीत के लिए बुलाया है, और इस वजह से किसान अब हरियाणा की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे। 

इसके बजाय, 19 मार्च तक विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किए जाएंगे ताकि सरकार पर दबाव बना रहे। किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने इस बारे में और जानकारी देते हुए कहा कि सोमवार को आगामी रणनीति के बारे में ऐलान किया जाएगा, और यह निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा के साथ चर्चा करने के बाद लिया जाएगा। यह किसान आंदोलन 13 फरवरी 2021 से शुरू हुआ था, और इस समय तक एक साल से भी ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन किसान अब भी पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर डटे हुए हैं। उनकी प्रमुख मांग यह है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानूनी गारंटी दी जाए, ताकि वे अपनी उपज की उचित कीमत सुनिश्चित कर सकें। इसके अलावा, वे यह भी चाहते हैं कि उन किसानों के खिलाफ जो मामले दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए, ताकि उनका संघर्ष खत्म हो सके। सरकार ने किसानों से बातचीत शुरू करने का प्रयास किया है, लेकिन किसान नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

 शनिवार को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के साथ बैठक के बाद मीडिया से बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि बैठक एक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और अगली वार्ता 19 मार्च को चंडीगढ़ में आयोजित की जाएगी। चौहान ने यह भी बताया कि केंद्रीय दल ने बैठक के दौरान किसान कल्याण कार्यक्रम को पेश किया, जो नरेंद्र मोदी सरकार की प्राथमिकता है। इस कार्यक्रम के तहत, सरकार ने किसानों की भलाई के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है। बैठक में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा, गुरमीत सिंह खुड्डियां और लाल चंद कटारूचक भी मौजूद थे, जिन्होंने किसान नेताओं के साथ चर्चा की। किसान नेताओं, जैसे जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंढेर, ने पहले ही बैठक स्थल पर पहुंचकर सरकार के सामने अपनी मांगों को रखने के साथ-साथ एमएसपी पर कानूनी गारंटी के लिए तथ्यों और आंकड़ों का समर्थन किया। इन नेताओं ने सरकार से यह स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा, और वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

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