लांबा ने सोशल मीडिया पर यह उल्लेख करते हुए लिखा, "कल, कालकाजी विधानसभा से AAP की उम्मीदवार और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी जी, जाम में फंसने के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाईं। जब दिल्ली की मुख्यमंत्री को अपने कार्यों को समय पर पूरा करने में कठिनाई हो रही है, तो आम जनता को किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।" इसके साथ ही उन्होंने कहा, "इसी कारण मैंने तय किया कि आज मैं बिना किसी असुविधा या परेशानी के, अपनी टीम के कुछ वकीलों के साथ बेहद साधारण तरीके से नामांकन दाखिल करूंगी, ताकि जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।"
आतिशी के नामांकन में देरी क्यों हुई?
आतिशी के नामांकन में देरी का कारण एक रोड शो था, जिसे वे नामांकन दाखिल करने से पहले कर रही थीं। खबरों के मुताबिक, आतिशी ने गिरि नगर स्थित एक गुरुद्वारे में मत्था टेकने के बाद मनीष सिसोदिया के साथ एक रोड शो आयोजित किया। रोड शो के दौरान समय की अधिक खपत हो गई और वह नामांकन दाखिल करने की समय सीमा तक निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर नहीं पहुंच पाईं। नामांकन दाखिल करने का समय हर दिन दोपहर तीन बजे तक निर्धारित था, लेकिन रोड शो के कारण वह समय पर नामांकन नहीं कर पाईं। इसके बाद, वे अरविंद केजरीवाल और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ निर्वाचन आयोग के दफ्तर चली गईं, जहां उन्होंने आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के तहत नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया में एक विशिष्ट समय सीमा निर्धारित होती है, और यह सीमा हर दिन दोपहर तीन बजे तक होती है। हालांकि, आतिशी समय पर नामांकन दाखिल नहीं कर पाईं, लेकिन उन्होंने इसे चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ मिलकर उचित तरीके से हल किया। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर आलका लांबा ने अपने समर्थन में कहा कि इस तरह की स्थिति से यह भी साबित होता है कि यदि दिल्ली की मुख्यमंत्री खुद अपने कार्यों को समय पर नहीं कर पा रही हैं, तो आम जनता के लिए विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आलका लांबा का दृष्टिकोण
आलका लांबा का कहना है कि यह पूरी स्थिति एक उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि जनता को एक तरह से गलत दिशा में ले जाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और उसकी नेतृत्व वाली सरकार दिल्ली की जनता को अपने चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है, और उनके लिए यह समय है कि वे इसे पहचानें और सही निर्णय लें।
इस मामले में, अलका लांबा के साथ-साथ दिल्ली की राजनीति में हर कदम पर जुड़े होने के कारण जनता की असुविधा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। इसके लिए उन्होंने नामांकन दाखिल करने के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने का प्रयास किया।
इस बीच, दिल्ली में चुनावी हलचल तेज हो गई है, और पार्टियों के बीच मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। इन चुनावों में किसी भी तरह की गलतफहमी या किसी के काम में किसी प्रकार की देरी को बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है, और यही वजह है कि आलका लांबा ने अपनी तरफ से चुनावी प्रक्रिया को सही और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का फैसला किया।
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